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13 जीवनरक्षक दवाइयां निकली अमानक, मध्य प्रदेश में इनके उपयोग पर लगाई रोक

मध्य प्रदेश में 13 जीवनरक्षक दवाइयों को अमानक पाया गया है, जिसके कारण इनके उपयोग पर प्रदेश में रोक लगा दी गई है। ये दवाइयां भोपाल की ड्रग टेस्टिंग लैब में जांच के लिए भेजी गई थीं। इनमें गर्भवती महिलाओं में हार्मोन बढ़ाने वाली दवाइयों के साथ ही एनेस्थिसिया के इंजेक्शन भी शामिल हैं।

By Prashant Pandey

Publish Date: Wed, 26 Feb 2025 03:04:06 PM (IST)

Updated Date: Wed, 26 Feb 2025 03:15:28 PM (IST)

गर्भवती महिलाओं में हार्मोन बढ़ाने वाली दवाइयां भी शामिल।

HighLights

  1. मध्य प्रदेश में अमानक दवाइयों के उपयोग पर तत्काल रोक लगाई गई।
  2. ये सभी ड्रग टेस्टिंग लैब में जांच के लिए भेजी गई थीं ये सभी दवाइयां।
  3. गर्भवती महिलाओं और एनेस्थिसिया के लिए उपयोग होने वाली दवाइयां।

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भोपाल की ड्रग टेस्टिंग लैब में 13 जीवनरक्षक दवाइयां अमानक निकली हैं। इस कारण इनके उपयोग पर प्रदेश में रोक लगा दी गई है। इनमें से कुछ दवाइयों के सैंपल ड्रग विभाग ने एमवाय अस्पताल से भी सामान्य प्रक्रिया के अंतर्गत लिए थे।

मध्य प्रदेश लोक स्वास्थ्य सेवा निगम ने जीवनरक्षक दवाएं, सलाइन और सिरिंज अमानक पाए जाने पर तत्काल रोक लगाने के आदेश दिए हैं। यह आदेश प्रदेश के सभी जिलों में स्वास्थ्य विभाग को भेजे हैं। इसमें गर्भवती महिलाओं में हार्मोन बढ़ाने वाली दवाइयों के साथ ही एनेस्थिसिया के इंजेक्शन भी शामिल हैं।

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आदेश के मुताबिक डेक्सट्रोस 5 प्रतिशत (बैच नंबर- एमपी230801055), नार्मल सलाइन 0.9 प्रतिशत (बैच नंबर-एमपी22063102), डिस्पोजेबल सिरिंज विथ निडल 2 एमएल (बैच नंबर- आर2203171), केटेमाइन हाइड्रोक्लोराइड 10 एमजी (बैच नंबर- वी22197), माइक्रोनाइज्ड प्रोगेस्ट्रोन 100 एमजी (बैच नंबर यूएचटी22004), सोडियम बिकार्बोनेट इंजेक्शन (बैच नंबर-1322038), नाइट्रोग्लिसरिन इंजेक्शन 25 एमजी (बैच नंबर-एआई22328), एस्प्रिन लो डोज 75 एमजी (बैच नंबर-एपीएसटी1012) आदि पर रोक लगाई है।

डॉक्टरों पर एमवायएच में भर्ती मरीज से मारपीट का आरोप

अक्सर शिकायत आती रहती हैं कि एमवाय अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता है। मंगलवार को ऐसी घटना सामने आई है। आरोप है कि वार्ड में भर्ती एक मरीज के साथ डॉक्टरों ने मारपीट की और बिना इलाज के उसे भगा दिया।

मरीज 34 वर्षीय दीपक मोरे निवासी परदेशीपुरा की बस इतनी गलती थी कि वह पैर का पट्टा खोलकर शौचालय गया था। मरीज हाथ जोड़कर छोड़ने की गुहार लगाता रहा, लेकिन डॉक्टर ने जिस पैर में चोट लगी, उसे ही मोड़ दिया।

मारपीट का आरोप विभागाध्यक्ष डॉ. कुंदन कुशवाह की यूनिट में जूनियर डॉक्टरों पर लगाया गया है। मामले में अस्पताल अधीक्षक को मरीज की पत्नी ने लिखित शिकायत की है।

चार डॉक्टरों ने पकड़े मरीज के हाथ, एक ने की मारपीट

पायल ने बताया कि घटना के समय बच्चों की परीक्षा के चलते वह घर आई थी। दीपक अकेले ही वहां थे। वह 15 दिन पहले पलंग से नीचे गिर गए थे। इससे फ्रेक्चर हो गया था।

सर्जरी के लिए भी इंतजार कर रहे थे। मारपीट के दौरान करीब चार डाक्टरों ने उनके हाथ पकड़े और एक ने करीब 25 थप्पड़ मारे। जिससे उनका मुंह भी सूज गया है और गले में भी चोट आई है। दीपक लाइट फिटिंग का काम करता है।

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