बोहरा समाज ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल का उपयोग से दूर करने का निर्णय लिया है। बच्चों को शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए मोबाइल के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मानसिक और शारीरिक विकास के लिए फायदेमंद कदम है।
By Neeraj Pandey
Publish Date: Thu, 19 Dec 2024 10:44:56 PM (IST)
Updated Date: Thu, 19 Dec 2024 10:44:56 PM (IST)
HighLights
- मोबाइल फोन पर बच्चों को धार्मिक शिक्षा भी नहीं दी जाएगी
- धर्मगुरु की मंशा पर समाजजनों ने शपथ ले पालन शुरू किया
- फोन की बजाय बच्चों में शारीरिक गतिविधियां बढ़ाने का उद्देश्य
नईदुनिया प्रतिनिधि, आलीराजपुर : बोहरा समाज ने एक अच्छी सामाजिक पहल की है। समाज में 15 साल से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल के उपयोग से दूर किया गया है। 53वें धर्मगुरु सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन की मंशा पर बोहरा समाज ने यह कदम उठाया गया है। मस्जिदों में समाजजनों को इसके लिए हिदायत दी जा रही है, वहीं मदरसों में भी 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल का उपयोग न करने की शपथ दिलाई गई है।
मोबाइल फोन से धार्मिक शिक्षाओं पर प्रतिबंध
मदरसों द्वारा बच्चों को कई धार्मिक शिक्षाएं भी मोबाइल फोन से दी जा रही थी। अब इस पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। दरअसल, मोबाइल फोन की वजह से बच्चे खेलकूद से दूर हो गए हैं। इससे उनका शारीरिक व मानसिक विकास बाधित हो रहा है। बच्चे कई मानसिक बीमारियों के शिकार भी हो रहे हैं।
इसी कारण बोहरा समाज धर्मगुरु सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन सैयदना ने पिछले दिनों प्रवचन के दौरान कहा था कि 15 साल से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल फोन नहीं दिया जाना चाहिए। इस पर समाज के प्रमुख लोगों को यह दायित्व दिया गया कि समाज के हर एक व्यक्ति तक सैयदना का यह संदेश पहुंचाएं और इस बारे में जागरूक किया जाए।
शारीरिक गतिविधियां बढ़ाने का उद्देश्य
बोहरा समाज के स्थानीय आमिल शेख कौसर जमाली ने बताया कि सैयदना साहब की मंशा यह है कि बच्चे शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाएं तथा मैदानी खेल खेलें। मोबाइल फोन के अधिक उपयोग के कारण बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बाधित हो रहा है।
मोबाइल की स्क्रीन पर लगातार देखते रहने से आंखों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। धर्मगुरु के आदेश का समाज में सभी लोगों ने कड़ाई से पालन शुरू कर दिया है। अधिकांश समाजजनों ने इसका पालन भी शुरू कर दिया है। बच्चे भी इस आदेश का पूरी तरह से पालन कर रहे हैं।
यह कहते हैं विशेषज्ञ
मनोचिकित्सक डा. देवेंद्र उन्नी बताते हैं कि स्मार्टफोन फोन को लेकर सबसे बड़ी चिंता इंटरनेट पर कई गलत सूचनाओं का होना है। स्मार्टफोन के उपयोग से बच्चे कई गलत जानकारियों ग्रहण कर रहे हैं। बच्चों में कई मानसिक विकास भी पैदा हो रहे हैं।
कई ऐसी जानकारियां भी मोबाइल फोन से बच्चे हासिल कर रहे हैं, जो 18 साल उम्र के बाद ही हासिल होनी चाहिए। इसका असर भी मानसिक सेहत पर पड़ रहा है। इतना ही नहीं मोबाइल की लत कई मर्तबा जानलेवा भी साबित हो सकती है।
मोबाइल फोन पूरी तरह खराब चीज नहीं है, मगर उसका उपयोग सीमित और सकारात्मक होना चाहिए। बच्चे मोबाइल फोन के माध्यम से क्या देख-सुन रहे हैं, यह अभिभावकों को पता होना चाहिए।
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