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कभी लकवा ने कर दिया था बेबस, अब दुनिया के नंबर 1 जूनियर लिफ्टर! जानें कहानी…

कभी लकवा ने कर दिया था बेबस, अब दुनिया के नंबर 1 जूनियर लिफ्टर! जानें कहानी…

Agency:News18 Jharkhand

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Jamshedpur News : नील अमृत त्रिपाठी, जो 22 वर्ष की आयु में जूनियर स्ट्रेंथ लिफ्टिंग चैंपियन बन चुके हैं, अपनी संघर्षपूर्ण यात्रा से प्रेरणा देते हैं. न्यूरोलॉजी बीमारी के बाद भी उन्होंने योग, व्यायाम और कड़ी मे…और पढ़ें

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जमशेदपुर. जमशेदपुर के 22 वर्षीय नील अमृत त्रिपाठी सहनशीलता और प्रेरणा के प्रतीक हैं. वर्तमान में वे बीए एलएलबी की पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन उनकी पहचान भारत के जूनियर स्ट्रेंथ लिफ्टिंग चैंपियन के रूप में हो चुकी है. चार नेशनल रिकॉर्ड और दो गोल्ड मेडल जीतने वाले नील ने हाल ही में हरियाणा में आयोजित इंडियन स्ट्रेंथ लिफ्टिंग फेडरेशन चैंपियनशिप में 68 किलो वर्ग में 612.5 किलो वजन उठाकर भारत के नंबर वन जूनियर स्ट्रेंथ लिफ्टर का खिताब जीता. इसके साथ ही, उन्होंने 262.5 किलो का हैक लिफ्ट कर एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया.

नील का सफर संघर्ष से भरा रहा है. 2018 में न्यूरोलॉजी बीमारी के कारण उनका दायां हिस्सा पूरी तरह से लकवाग्रस्त हो गया था. डॉक्टरों ने उनके चलने-फिरने और भारी सामान उठाने की संभावना को नकार दिया था. इस दौरान जब उनके दोस्त स्कूल जाते और खेल-कूद में भाग लेते, नील बेबस होकर उन्हें देखा करते. हालांकि, उन्होंने हार मानने की बजाय खुद को मजबूत बनाने का संकल्प लिया.

योग और व्यायाम से मिली नई जिंदगी
नील ने शुरुआत योग और मेडिटेशन से की. धीरे-धीरे उन्होंने व्यायाम शुरू किया. इलाज और दवाइयों के चलते उनका वजन 105 किलो तक बढ़ गया था, लेकिन दृढ़ निश्चय के साथ उन्होंने जिम ज्वाॅइन किया. वहां उनके ट्रेनर ने सही मार्गदर्शन और डाइट प्लान देकर उनका वजन 45 किलो तक कम कर दिया.  नील की जिंदगी तब बदली जब उन्होंने देखा कि उनके जिम के साथी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमा रहे हैं. इससे प्रेरित होकर उन्होंने एक अच्छे डाइटिशियन और सलाहकार से मार्गदर्शन लिया. कड़ी मेहनत और अनुशासन के बल पर उन्होंने खुद को न सिर्फ शारीरिक रूप से मजबूत बनाया, बल्कि मानसिक रूप से भी अविचलित रखा.

नील आज एक मिसाल हैं. उनकी कहानी सिखाती है कि किसी भी परिस्थिति में हार मानने की बजाय आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए. वे कहते हैं, “परिस्थिति कैसी भी हो, मेहनत और लगन से सबकुछ संभव है.” उनकी उपलब्धियां न सिर्फ जमशेदपुर बल्कि पूरे भारत के युवाओं को प्रेरित करती हैं.

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