यादों में सरोज खान: संघर्षों से शुरू हुआ सफर, ऐसे बनीं बॉलीवुड की ‘मदर ऑफ कोरियोग्राफी’इसके बाद तो जैसे उनका जादू बॉलीवुड पर चल पड़ा। मिस्टर इंडिया का ‘हवा हवाई’, तेजाब का ‘एक दो तीन’, बेटा का ‘धक धक करने लगा’, देवदास का ‘डोला रे डोला’, खलनायक का चोली के पीछे क्या है, हम दिल दे चुके सनम का निंबोडा, थानेदार का तम्मा तम्मा लोगे, मिस्टर इंडिया का काटे नहीं कटते और फिल्म चांदनी का मेरे हाथों में नौ-नौ चूड़ियां- ये सिर्फ गाने नहीं थे, बल्कि एक युग बन गए।
सरोज खान की खासियत यह थी कि वह हर एक्ट्रेस को उसकी पहचान के हिसाब से ढाल देती थीं। चाहे श्रीदेवी हों या माधुरी दीक्षित, रेखा हों या ऐश्वर्या राय- हर किसी के डांस में सरोज खान की छाप साफ दिखाई देती थी। उन्होंने डांस को सिर्फ ग्लैमर नहीं दिया, बल्कि उसमें भावना और कहानी जोड़ दी।
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इसके बाद तो जैसे उनका जादू बॉलीवुड पर चल पड़ा। मिस्टर इंडिया का ‘हवा हवाई’, तेजाब का ‘एक दो तीन’, बेटा का ‘धक धक करने लगा’, देवदास का ‘डोला रे डोला’, खलनायक का चोली के पीछे क्या है, हम दिल दे चुके सनम का निंबोडा, थानेदार का तम्मा तम्मा लोगे, मिस्टर इंडिया का काटे नहीं कटते और फिल्म चांदनी का मेरे हाथों में नौ-नौ चूड़ियां- ये सिर्फ गाने नहीं थे, बल्कि एक युग बन गए।
सरोज खान की खासियत यह थी कि वह हर एक्ट्रेस को उसकी पहचान के हिसाब से ढाल देती थीं। चाहे श्रीदेवी हों या माधुरी दीक्षित, रेखा हों या ऐश्वर्या राय- हर किसी के डांस में सरोज खान की छाप साफ दिखाई देती थी। उन्होंने डांस को सिर्फ ग्लैमर नहीं दिया, बल्कि उसमें भावना और कहानी जोड़ दी।
इसके बाद तो जैसे उनका जादू बॉलीवुड पर चल पड़ा। मिस्टर इंडिया का 'हवा हवाई',…