भोपाल साकेत नगर स्थित भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में शुक्रवार को मोक्ष कल्याणक महोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मंदिर के मूलनायक महावीर भगवान का महामस्तकाभिषेक बड़े धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। अध्यक्ष नरेन्द्र टोंग्या ने बताया कि
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हेमलता जैन ने बताया कि जैन समाज में दीपावली का पर्व चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। जैन ग्रंथों के अनुसार, महावीर स्वामी को चतुर्दशी के प्रत्यूष काल में मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।
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मंदिर अध्यक्ष नरेंद्र टोंग्या और उनकी परिवार को मूलनायक के पहले अभिषेक का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जबकि मुख्य निर्वाण लाडू का अर्पण सुशीला जैन एवं उनके परिवार ने किया। इस अवसर पर राजश्री बसंत जैन एवं परिवार को भगवान की पहली शांतिधारा का सौभाग्य मिला।
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साकेत नगर जैन समाज ने इस बार “बिना बोली निर्वाण महोत्सव” मनाने की एक नई परंपरा की शुरुआत की। अध्यक्ष नरेंद्र टोंग्या के प्रयासों के परिणामस्वरूप, 15 दिन पहले ही ऑनलाइन बोली के माध्यम से त्योहार के लाडू अर्पित करने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया।
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अध्यक्ष टोंग्या ने बताया कि जैन धर्म में लक्ष्मी का अर्थ होता है निर्वाण और सरस्वती का अर्थ होता है केवल ज्ञान, इसलिए लक्ष्मी-सरस्वती का पूजन दीपावली के दिन किया जाता है। इस दिन प्रातःकाल जैन मंदिरों में भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण उत्सव मनाते समय भगवान की पूजा में केवल शक्कर की चाशनी से बने लाड़ू चढ़ाए जाते हैं। लड्डू गोल होता है, जिसका अर्थ होता है जिसका न आरंभ है और न अंत। आत्मा भी अखंड लड्डू की तरह होती है, जिसका न आरंभ होता है और न ही अंत। लड्डू बनाते समय चाशनी को कड़ाही में तपना पड़ता है उसी प्रकार अखंड आत्मा को भी तपश्चरण की आग में तपना पड़ता है तभी मोक्षरूपी चाशनी की मधुरता मिलती है।
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