मेनन के निधन के बाद उनकी पत्नी पेड़-पौधों की देखभाल कर रही हैं।
पर्यावरण प्रेम के कारण पद्मश्री कुट्टी मेनन का घर आज इंदौर ही नहीं पूरे प्रदेश में एक मिसाल बना हुआ है। इसी तर्ज पर उज्जैन के माधव साइंस कॉलेज के प्रिंसिपल और बॉटनी के प्रोफेसर हरीश व्यास का घर भी ईको फ्रेंडली ग्रीन हाउस होने के चलते एक इंटरनेशनल और
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आज 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं कि इंदौर-उज्जैन के इन दोनों घरों के ईको फ्रेंडली ग्रीन हाउस बनने की कहानी…
सबसे पहले बात पद्मश्री कुट्टी मेनन के घर की मेनन का पेड़-पौधों से ऐसा प्रेम रहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन ही जैविक कृषि को दे दिया। इसकी शुरुआत उन्होंने अपने घर से ही की। 3 में से 2000 स्क्वायर फीट पेड़-पौधों के लिए सुरक्षित किया। हर साल, हर मौसम में खूब पेड़-पौधे लगाए और उनकी सेवा की। इसमें पत्नी भी घर की जिम्मेदारियों के साथ सहयोग करती थी। चार साल पहले पर्यावरणविद पति की मौत हो गई, लेकिन पत्नी ने उनके सेवा कार्य को जारी रखा।
अब वह 79 वर्ष की उम्र में घर के हजारों पेड़-पौधों की रोज छह घंटे सेवा करती हैं। हरियाली की चादर ओढ़े उनका बंगला इंदौर की एक अलग ही पहचान बन गया है। खास बात यह कि इंदौर में भीषण गर्मी में भी उनके बंगले का तापमान बाहर से 6 डिग्री कम रहता है।
इंदौर में 46 संवाद नगर स्थित पद्मश्री कुट्टी मेनन का घर।
केरल से इंदौर आकर बसे थे कुट्टी मेनन जैविक कृषि के जानकार कुट्टी मेनन को उनकी सेवाओं के कारण 1991 में पद्मश्री से विभूषित किया गया था। इंदौर में कस्तूरबा गांधी के नाम पर स्थापित कस्तूरबा ग्राम में जैविक खेती और पर्यावरण मित्र सिंचाई में उनके योगदान के लिए 1989 में उन्हें प्रतिष्ठित जमनालाल बजाज पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। मूलतः केरल के त्रिशूर जिले के कोदूंगल्लूर कस्बे में 1940 में जन्मे कुट्टी मेनन 1961 में इंदौर आए तो फिर यहीं के होकर रह गए।
ईको फ्रेंडली आर्किटेक्चर और ईको फ्रेंडली लाइफस्टाइल पत्नी मनोरमा भी जैविक खेती में कस्तूरबा ग्राम में पेड़-पौधे के लिए काफी समय देती थी। 1993 में मेनन की सेवा समाप्त होने के बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उन्हें 46 संवाद नगर में एक 3 हजार वर्ग फीट का प्लॉट आवंटित किया। शहर की प्राइम लोकेशन पर मिले इस प्लॉट पर मेनन ने हरियाली के लिए 2 हजार वर्ग फीट की जमीन छोड़ी, ताकि शुद्ध हवा के साथ इकोसिस्टम भी बना रहे। ईको फ्रेंडली आर्किटेक्चर और ईको फ्रेंडली लाइफस्टाइल के हिसाब से बंगला डिजाइन कराया।
बीते सालों में परिवार ने यहां काफी पेड़ पौधे लगाए। बंगले में 2 हजार से ज्यादा पौधे लगे हैं। जब इंदौर में पारा 44 डिग्री के आसपास पहुंच जाता है, तब भी यहां AC की जरूरत नहीं होती है। सिस्टम ऐसा हो गया कि उनका बंगला गर्मी में ठंडा और ठंड में गर्म रहता है। गर्मी में यहां का तापमान बाहर से 6 डिग्री कम रहता है। बंगले में ऐसी हरियाली विकसित है कि तीसरी मंजिल तक हर खिड़की के सामने बड़े हो चुके पेड़-पौधों से शुद्ध हवा आती है।

सपनों में दिखती थीं पति की पर्यावरण सेवाएं चार साल पहले मेनन के निधन के बाद पत्नी मनोरमा को गहरा सदमा लगा था। उनके दो बेटे हैं। इनमें से एक बेटे की पिछले साल हार्ट अटैक से मौत हो गई। दूसरा जॉब के कारण बाहर है। पति के निधन के बाद मनोरमा मेनन को परिसर में लगे हर पेड़-पौधे, पति द्वारा पर्यावरण के लिए की गई सेवा सपने में दिखने लगी।
सपने में हमेशा हर भरा कस्तूरबाग्राम ही दिखता था। सुंदर, खेती, हरियाली वाला नजारा दिखता था। रोज सुबह से हर स्थान पर हरियाली देख उन्हें सुकून मिलता है। इस पर उन्हें खुद को टूटने नहीं दिया, बल्कि पति की तरह बाकी जीवन भी पेड़-पौधों में लगा दिया।

ऐसा है इस घर का ईको सिस्टम यहां कई पेड़-पौधे ऐसे हैं, जिनके फल पक्षी ही खाते हैं। यहां कई तरह की तितलियां, चिड़िया, तोते, बुलबुल सहित कई पक्षी आते हैं। मिट्टी वाली जमीन के कारण बारिश में केचुएं भी रहते हैं, जो पौधों के लिए काफी सहायक हैं। इस कारण इस छोटे से स्थान पर इनका अच्छा खासा ईको सिस्टम बन गया है। बाहर से हरियाली ओढ़े यह बंगला लोगों को खूब आकर्षित करता है।
अब बात उज्जैन के दो अवॉर्ड जीतने वाले ईको फ्रेंडली ग्रीन हाउस की…
टैरेस पर बनाया 400 फीट का गार्डन, उगा रहे फल-फूल और सब्जी

माधव साइंस कॉलेज के प्रिंसिपल व्यास का ऋषिनगर के पास व्यास नगर स्थित घर अब तक एक इंटरनेशनल और एक नेशनल अवॉर्ड जीत चुका है।
बॉटनी पढ़ाने ही नहीं उसे पूरी तरह जीने और आत्मसात करने वाले उज्जैन के प्रोफेसर हरीश व्यास के घर को देखकर आप चौंक जाएंगे। माधव साइंस कॉलेज के प्रिंसिपल व्यास सर का ऋषिनगर के पास व्यास नगर स्थित घर अब तक एक इंटरनेशनल और एक नेशनल अवॉर्ड जीत चुका है। बॉटनी के प्रोफेसर हरीश व्यास ने अपने घर को ईको-फ्रेंडली ग्रीन हाउस में तब्दील करने के लिए टैरेस पर 400 फीट का गार्डन डेवलप किया है।
प्रोफेसर व्यास ने ‘अपनी बिजली, अपना पानी, अपनी सब्जी’ के कॉन्सेप्ट पर काम करते हुए गार्डन में 100 से अधिक प्रजाति के पौधे उगाए हैं। इस ईको फ्रेंडली घर में हरी पत्तेदार सब्जियों के साथ खुशबूदार फूल और विभिन्न प्रकार के पौधे लगाए गए हैं। पौधों की वजह से घर का तापमान भी अन्य घरों की अपेक्षा करीब दो डिग्री तक कम रहता है।
प्रोफेसर व्यास बताते हैं कि टैरेस पर ऑर्गेनिक गार्डन बनाने की शुरुआत 5 जून 2018 को पर्यावरण दिवस पर ही की थी। पूरी खबर पढ़ें
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