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‘ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में था सुरक्षित’, जयशंकर ने कहा- पाक आतंकी दुनिया को सताएंगे

एस. जयशंकर ने यूरएक्टिव को दिए इंटरव्यू में पश्चिमी देशों की पाकिस्तानी आतंकवाद पर चुप्पी की आलोचना की। उन्होंने आतंकवाद को वैश्विक खतरा बताया और भारत की संतुलित विदेश नीति को रेखांकित किया। मुक्त व्यापार समझौते के बीच यह बयान भारत-ईयू संबंधों की गहराई को दर्शाता है।

By Anurag Mishra

Publish Date: Wed, 11 Jun 2025 05:52:45 PM (IST)

Updated Date: Wed, 11 Jun 2025 05:52:45 PM (IST)

'ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में था सुरक्षित', जयशंकर ने कहा- पाक आतंकी दुनिया को सताएंगे
एस जयशंकर ने पश्चिमी देशों को दिखाया आइना। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. लादेन की पाकिस्तान में मौजूदगी पर उठाए सवाल।
  2. 1947 में पश्चिम की चुप्पी पर जताई नाराजगी।
  3. रूस-यूक्रेन मुद्दे पर भारत का संतुलित रुख स्पष्ट।

एजेंसी। यूरोपीय समाचार आउटलेट यूरएक्टिव को दिए इंटरव्यू में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पश्चिमी देशों को उनके पाकिस्तानी आतंकवाद के खिलाफ चुप्पी पर कड़ा प्रहार किया। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर चल रही बातचीत के बीच उनकी यह टिप्पणी आई। जयशंकर ने आतंकवाद को वैश्विक खतरा बताया, जिस पर पश्चिमी देशों को विचार करने को कहा।

आतंकवाद पर दोहरा रवैया

जयशंकर ने कहा कि ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान के एबटाबाद में मौजूद था। वह पाकिस्तान के सैन्य वर्ग का गढ़ है। वह वर्षों तक वहां सुरक्षित रहा। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक आतंकवाद केवल भारत-पाकिस्तान का मुद्दा नहीं है। यह व्यापक खतरा है। यह आतंकवाद आपके लिए भी खतरा बनेगा।

पश्चिम की ऐतिहासिक चुप्पी

  • 1947 में पाकिस्तान ने कश्मीर में सशस्त्र घुसपैठियों को भेजा था। इस मामले पर पश्चिमी देशों ने उस समय पाकिस्तान का समर्थन किया था। वे देश तब चुप थे। अब अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों पर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। उन्होंने पश्चिम के इस दोहरे रवैये पर आत्मचिंतन की जरूरत बताई।
  • ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत की हालिया आतंकवाद-विरोधी कार्रवाइयों पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की आलोचना को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि हम युद्ध से मतभेद सुलझाने में विश्वास नहीं करते। हम समाधान थोपने वाले नहीं, लेकिन तटस्थ भी नहीं हैं।
  • यूक्रेन-रूस पर भारत का रुख

    रूस के खिलाफ प्रतिबंधों में शामिल न होने की आलोचना पर जयशंकर ने भारत के संतुलित दृष्टिकोण को दिखाया। उन्होंने कहा कि भारत रूस और यूक्रेन दोनों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध रखता है। युद्ध के बजाय कूटनीति में विश्वास करता है। बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यूरोप को अब अपने हितों में निर्णय लेने होंगे, जो वैश्विक रिश्तों पर आधारित हों।

    यूरोप के साथ साझेदारी

    जयशंकर ने यूरोप में “रणनीतिक स्वायत्तता” जैसे शब्दों के बढ़ते उपयोग पर ध्यान दिलाया, जो कभी भारत की कूटनीतिक शब्दावली का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि ईयू वैश्विक व्यवस्था में एक प्रमुख ध्रुव है। यही कारण है कि मैं इस बहुध्रुवीय विश्व में हमारे रिश्तों को गहरा करने के लिए यहां हूं।

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