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खुशी कूलवाल आत्महत्या केस : सात साल बाद फिर खुली फाइल, नप सकते हैं कई नेता-अफसर

खुशी कूलवाल आत्महत्या केस : सात साल बाद फिर खुली फाइल, नप सकते हैं कई नेता-अफसर

मध्य प्रदेश के फेमस यशवंत क्लब की सदस्य रही खुशी कूलवाल की आत्महत्या का मामला फिर से प्रकाश में है. इस केस की फाइल दोबारा खोल ही गई है। आरोप था कि मामले में शहर के प्रतिष्ठित लोगों के नाम आने से पुलिस ने उस वक्त मामला दबा दिया था। आइए जानते है क्या था पूरा मामला और किन लोगों का नाम है शामिल…

By Aditya Kumar

Edited By: Aditya Kumar

Publish Date: Sun, 01 Jun 2025 03:14:30 PM (IST)

Updated Date: Sun, 01 Jun 2025 03:14:30 PM (IST)

खुशी कूलवाल आत्महत्या केस की फाइल सात साल बाद खुली

HighLights

  1. सात साल पुराना है हाईप्रोफाइल केस, शराब और ड्रग्स पार्टी की शौकीन थी खुशी।
  2. महालक्ष्मीनगर के होराइजन ओएसिस पार्क में लगाई थी फांसी।
  3. कारोबारी, अफसर और राजनेताओं के नाम आने से जांच दबा दी थी।

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर (Khushi Kulwal Suicide Case)। शहर के प्रतिष्ठित यशवंत क्लब की सदस्य रही खुशी कूलवाल के आत्महत्या केस की फाइल दोबारा खुल गई है। मामले में शहर के प्रतिष्ठित कारोबारी, अफसर और राजनेताओं के नाम आने से पुलिस ने उस वक्त मामला दबा दिया था। शनिवार को पुलिस आयुक्त संतोष कुमारसिंह ने इस हाईप्रोफाइल केस को दोबारा जांच की हरी झंडी दे दी।

क्या है पूरा मामला?

37 वर्षीय खुशी कूलवाल ने जुलाई 2018 में होराइजन ओएसिस पार्क महालक्ष्मीनगर के फ्लैट में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। बैकुंठधाम कालोनी पलासिया निवासी बड़े कारोबारी मयंक से तलाक लेने के बाद खुशी इस फ्लैट में रहने आ गई थी। आत्महत्या के पूर्व वह बिजलपुर निवासी दोस्त राहुल पाटनवाला के साथ थी। खुशी के फांसी लगा लेने पर राहुल फ्लैट से भाग गया था। इस बहुचर्चित आत्महत्या मामले में कांग्रेस के पूर्व विधायक के भाई से कनेक्शन जुड़ने के कारण तत्कालीन पुलिस अफसरों ने मामला दबा दिया था। पूर्व विधायक का भाई खुशी के साथ ड्रग्स पार्टी करता था। धोखाधड़ी में नाम आने के बाद जोन-2 के डीसीपी अभिनय विश्वकर्मा ने शनिवार को केस डायरी बुलाकर दोबारा जांच शुरू कर दी। केस की निष्पक्ष जांच हुई तो पब-होटल, रेस्त्रां और विदेश में पार्टियों के शौकीन कारोबारी, नेता और अफसर नप सकते हैं।

पब में ड्रग्स पार्टी करती थी खुशी

खुशी कूलवाल पिपल्याहाना क्षेत्र में रहने वाली मयूरी के माध्यम से ड्रग्स मंगवाती थी। वह देर रात पबों में शराब और ड्रग्स की पार्टियों की शौकीन थी। हाईप्रोफाइल लोग खुशी को बुलाते थे। घटना के कुछ दिनों पूर्व यशवंत क्लब से जुड़े कारोबारी उसे गोवा भी ले गए थे। पुलिस ने उस वक्त जिम ट्रेनर प्रकाश, दोस्त कमलेश, पवन यादव, ट्रैवल एजेंट अरविंद सिंह, दोस्त राहुल पाटनवाला के बयान लिए, मगर रसूखदारों की जांच दबा दी। खुशी के तीन मोबाइल भी जांच में शामिल किए, मगर अफसरों ने कहा- उसमें सुसाइड नोट नहीं मिला है।

कांग्रेस के पूर्व विधायक के भाई के इर्द-गिर्द घूम रही जांच

सात साल पुराने केस की जांच कांग्रेस के पूर्व विधायक के भाई के इर्द गिर्द घूम रही है। ड्रग्स पैडलर सोहन उर्फ जोजो(सेंधवा) से जुड़ा पूर्व विधायक का भाई खुशी के संपर्क में था। उसके नंबर मोबाइल से डिलिट करवा दिए गए थे। जांच में शामिल अफसर के मुताबिक जोजो पर साल 2020 में विजयनगर थाना ड्रग्स (एमडी) का प्रकरण दर्ज हुआ था। सोहन ने पूर्व विधायक के भाई का नाम ले लिया था। मेमोरेंडम में नाम आने के बाद भी तत्कालीन टीआइ तहजीब काजी ने गिरफ्तारी नहीं की। दिसंबर 2020 का ड्रग्स कांड भी री-ओपन कर दिया जाएगा।

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