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Dragon Boat Race Winner Komal Arwal: अरवल के करपी प्रखंड की रहने वाली कोमल कुमारी ड्रैगन बोट रेस में शानदार प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन कर रही हैं. वह हाल ही में चीन से मेडल जीतकर लौटी हैं. उनकी कहानी बेहद प्रेरणादायक है. जिले में सुविधा नहीं होने के कारण गांव की नदी में प्रैक्टिस कर मेडल जीत रही हैं.
अरवल जिले के करपी प्रखंड के डीही गांव की रहने वाली कोमल पढ़ाई के साथ-साथ खेल में भी रुचि रखती थी. स्कूल के टाइम से ही खेल के प्रति उनका रुझान था. थोड़ी बड़ी हुई तो रग्बी खेलने लगी. इसमें राष्ट्रीय लेवल पर गोल्ड भी जीती लेकिन इनकी मंजिल बोट रेसिंग थी.

एक टूर्नामेंट में उन्होंने ड्रैगन बोट रेस देखी, वहां से कोमल के मन में भी बोट रेसिंग की इच्छा जागी. गांव ने पुनपुन नदी बहती है. रोज वहां जाकर किसी दूसरे का नाव चलाने लगती थी. रेसिंग के प्रति रुझान को देखा पिता ने अपनी खुद की नाव बनवाई. इसके बाद कोमल घंटों नदी में नाव चलाने की प्रैक्टिस करने लगी.

2020 में कोमल को बिहार ड्रैगन बोट एसोसिएशन ने मोतिहारी कैंप में बुलाया गया. यहां तीन महीने के ट्रेनिंग के बाद उनका राष्ट्रीय टीम के लिए चयन हुआ. उन्होंने नेशनल लेवल पर तीन गोल्ड मेडल जीते.

2023 में थाईलैंड वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया. हालांकि, वहां उन्हें पदक नहीं मिला. लेकिन हार मानने की बजाय कोमल ने गांव लौटकर पुनपुन नदी में फिर से अभ्यास शुरू किया. 2024 में उनका चयन एशियन ड्रैगन बोट चैंपियनशिप के लिए हुआ. इसके बाद चीन के हांगकांग में 500 मीटर और 200 मीटर रेस में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया.

राज्य सरकार ने कोमल को तीन बार प्रोत्साहन राशि दी और सम्मानित किया. कोमल की मेहनत और लगन ने यह साबित कर दिया कि सच्ची लगन के आगे कोई भी अभाव मायने नहीं रखता. अभी कोमल जल्द ही 19 साल की होने वाली है. इसके बाद उन्हें मेडल लाओ नौकरी पाओ के तहत राज्य सरकार की तरफ से सरकारी नौकरी भी मिलेगी. कोमल का कहना है कि मैं अपने खेल को लगातार निखारते रहूंगी.

कोमल के पिता लालदेव सिंह एक भूमिहीन मजदूर हैं लेकिन कभी भी अपनी बेटी के उड़ान को नहीं रोका. वो लगातार अपनी बेटी को सपोर्ट करते रहें. कोमल उनकी चौथी बेटी है.

फिलहाल कोमल गोरखपुर के नौका विहार में ट्रेनिंग कर रही गईं.इसके अलावा वो जिले के ही एक कॉलेज ग्रेजुएशन कर रही है. कोमल का यह सफर पुनपुन नदी से शुरू हुआ और अबतक हांगकांग तक पहुंचा चुका है.
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