पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव चरम पर है। पाकिस्तान सेना प्रमुख असीम मुनीर के लापता होने की अफवाहें सोशल मीडिया पर तेजी से फैलीं। सरकार सफाई देती रही, लेकिन चुप्पी से संदेह गहरा गया। भारत ने सिंधु जल संधि निलंबित कर दी, जिससे हालात और बिगड़ गए।
By Anurag Mishra
Publish Date: Mon, 28 Apr 2025 04:39:29 PM (IST)
Updated Date: Mon, 28 Apr 2025 04:39:29 PM (IST)
HighLights
- पहलगाम हमले से तनाव चरम पर।
- भारत ने सिंधु जल संधि निलंबित की।
- रक्षा मंत्री ने लश्कर के वजूद को नकारा।
वर्ल्ड डेस्क, इंदौर। पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। इस बीच एक नया विवाद पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल सईद असीम मुनीर के ठिकाने को लेकर उभरा है।
सोशल मीडिया पर मुनीर आउट हैशटैग के साथ अफवाहें तेज हैं कि मुनीर और उनका परिवार पाकिस्तान छोड़कर भाग गया है। कुछ अपुष्ट दावों में कहा जा रहा है कि मुनीर या तो “लापता” हैं या रावलपिंडी में किसी सैन्य बंकर में छिपे हैं। इस अनिश्चितता ने पाकिस्तान की सैन्य और राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाए हैं।
मुनीर के भागने की अफवाहें
- सूत्रों के हवाले से खबरें हैं कि मुनीर, डीजी आईएसपीआर लेफ्टिनेंट जनरल असीम मलिक और चेयरमैन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी जनरल साहिर शमशाद मिर्जा ने निजी जेट और राजनयिक पासपोर्ट का उपयोग कर पाकिस्तान छोड़ दिया है। दावा है कि वे यूनाइटेड किंगडम या अमेरिका में शरण ले चुके हैं।
सरकार का बचाव और चुप्पी
- पाकिस्तानी सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए फोटोग्राफिक “सबूत” जारी किए हैं, जिसमें दावा किया कि सब कुछ सामान्य है। हालांकि, पहलगाम हमले के बाद के 48 घंटों में मुनीर की सार्वजनिक अनुपस्थिति ने संदेह को और गहरा दिया।
- भारत और पाकिस्तान के नेटिजन्स ने उनकी चुप्पी पर सवाल उठाए। एक यूजर ने टिप्पणी की कि उन्होंने अपने परिवार को विदेश भेज दिया हैं। वह खुद कहीं छिप गए हैं। इस दौरान भारत ने हमले में पाकिस्तानी संलिप्तता के खुफिया इनपुट्स के आधार पर ऐतिहासिक सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया, जिसे दोनों देशों के बीच चार युद्धों के बावजूद बरकरार रखा गया था।
रक्षा मंत्री का विवादास्पद बयान
- पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्काई न्यूज को दिए साक्षात्कार में दावा किया कि आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का पाकिस्तान में अब कोई वजूद नहीं है।
- उन्होंने कहा कि अगर मूल संगठन खत्म हो चुका है, तो उसकी शाखा (द रेसिस्टेंस फ्रंट) यहां कैसे पनप सकती है?” यह बयान पहलगाम हमले के तुरंत बाद आया, जिसे अंतरराष्ट्रीय दबाव को कम करने की कोशिश माना जा रहा है।
आगे क्या?
पहलगाम हमले में 26 नागरिकों की मौत ने दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों को और तनावपूर्ण कर दिया है। भारत के कड़े रुख और पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व की अनुपस्थिति ने इस्लामाबाद की रणनीति पर अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं।
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