वर्ल्ड बैंक की पावर्टी एंड शेयर्ड प्रॉस्पेरिटी’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2011-12 में कुल आबादी का 27.1 प्रतिशत गरीबी में जी रहे थे. अब साल 2022-23 में मात्र 5.3 प्रतिशत ही ऐसे लोग बचे है जो गरीबी रेखा से नीचे है। पाकिस्तान की बात करें तो वर्ष 2017-18 में गरीबी 4.9 प्रतिशत थी जो 2020-21 में बढ़कर 16.5 प्रतिशत पर आ चुकी है।
By Aditya Kumar
Edited By: Aditya Kumar
Publish Date: Tue, 10 Jun 2025 05:46:19 PM (IST)
Updated Date: Tue, 10 Jun 2025 05:46:19 PM (IST)
एजेंसी, नई दिल्ली। पाकिस्तान एक बार फिर दुनिया के सामने बेनकाब हो गया है. देश में बढ़ती महंगाई और घटती अर्थव्यवस्था लगातार पाकिस्तान को कर्ज की दलदल में ढकेलता जा रहा हैं. भारत और पाकिस्तान की सच्चाई को वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट ने सामने लाकर रख दिया है. एक ओर जहां भारत आर्थिक रुप से लगातार मजबूत हो रहा है वहां, दूसरी ओर पाकिस्तान में भुखमरी और गरीबी चरम पर है.
9 साल में कुल 26.9 करोड़ भारतीय गरीबी रेखा से उपर उठे
सबसे पहले चर्चा करते है उस रिपोर्ट की जिसमें यह सच्चाई सामने आई है. वर्ल्ड बैंक की पावर्टी एंड शेयर्ड प्रॉस्पेरिटी’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2011-12 में कुल आबादी का 27.1 प्रतिशत गरीबी में जी रहे थे. अब साल 2022-23 में मात्र 5.3 प्रतिशत ही ऐसे लोग बचे है जो गरीबी रेखा से नीचे है। यानी बीते 9 साल में कुल 26.9 करोड़ भारतीय गरीबी रेखा से उपर उठे है.
कर्ज लेने के बाद भी हालात नहीं सुधर रहे
इधर, पाकिस्तान की बात करें तो वर्ष 2017-18 में गरीबी 4.9 प्रतिशत थी जो 2020-21 में बढ़कर 16.5 प्रतिशत पर आ चुकी है। इस रिपोर्ट ने पाकिस्तान की पोल खोल दी है। पाकिस्तान में बढ़ती गरीबी, इस बात का साफ कर रही है कि दुनिया से कर्ज लेने के बाद भी देश के हालात सुधर नहीं रहे।
वर्ल्ड बैंक की परिभाषा?
जानकारी हो कि वर्ल्ड बैंक ने गरीबी की परिभाषा बदल दी है। अब वर्ल्ड बैंक ने अति गरीबी की रेखा 2.15 डॉलर से बढ़ाकर 3 डॉलर प्रति व्यक्ति हर दिन कर दिया है। इस बदलाव के करते ही पाकिस्तान की पोल खुल चुकी है।
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