पचमढ़ी गोंड शासक राजा भभूत सिंह के ऐतिहासिक योगदान को समेटे हुए है। वे जनजातीय समाज और शौर्य पराक्रम के प्रतीक थे। राजा भभूत सिंह की ऐतिहासिक भूमिका को फिर याद करने के लिए यहां मंत्रि-परिषद की बैठक आयोजित की गई है।
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1967 के बाद पचमढ़ी को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की प्रथा समाप्त
कैबिनेट बैठक जिस राजभवन में रखी गई है उसका निर्माण अंग्रेजों ने कराया था। यह भवन ग्रीष्मकाल में प्रदेश के राज्यपाल का निवास स्थल बन जाता था। 1967 की गर्मियों के बाद पचमढ़ी को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की प्रथा समाप्त हो गई। जिसके बाद राजभवन को भी बंद कर दिया गया था। कुछ साल पहले ही इसे दोबारा आम जनों के लिए खोला गया।
वीआईपी मेहमानों के लिए सुविधायुक्त गेस्ट रूम
पचमढ़ी में राज्यपाल के लिए जहां राजभवन है वहीं मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियोें के लिए भी बंगले बने हुए हैं। राजभवन तो विशाल परिसर में है जोकि करीब 22.84 एकड़ जमीन में फैला है। इसमें बड़ा कॉन्फ्रेंस रूम और डायनिंग हॉल है। राजभवन में एक बड़ा घुड़साल और हाथी शाला भी है। यहां वीआईपी मेहमानों के लिए सुविधायुक्त गेस्ट रूम भी बने हैं।
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