मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में इन दोनों सड़कों पर लगात से ज्यादा वसूली किए जाने को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है। …और पढ़ें
HighLights
- लेबड़-जावरा सड़क पर लगभग 605 करोड़ रुपये की लागत के मुकाबले 1300 करोड़ रुपये से अधिक टोल वसूला
- जावरा-नयागांव सड़क पर 450 करोड़ रुपये की लागत के मुकाबले करीब 1461 करोड़ रुपये की वसूली
- कोर्ट ने इन दोनों एजेंसियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, अब इस मामले में 28 अप्रैल को सुनवाई होगी
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। लेबड़ से जावरा तक 124.15 किमी और जावरा से नयागांव तक 127.81 किमी लंबे स्टेट हाईवे-31 (एसएच-31) पर टोल वसूली के मामले में हाई कोर्ट में चल रही जनहित याचिका में अब इन सड़कों का निर्माण करने वाली जावरा-नयागांव टोल रोड कंपनी प्रालि और वेस्टर्न एमपी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड टोल रोड प्रालि भी पक्षकार होंगी।
गुरुवार को जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इन दोनों एजेंसियों को पक्षकार बनाने के लिए प्रस्तुत आवेदन स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने इन दोनों एजेंसियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब 28 अप्रैल को सुनवाई होगी।
हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने एडवोकेट विभोर खंडेलवाल के माध्यम से दायर की है। एडवोकेट खंडेलवाल ने बताया कि एसएच-31 से जुड़ी इन दोनों सड़कों को लेकर पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने वर्ष 2020 में मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के समक्ष जनहित याचिका प्रस्तुत की थी। कहा था कि लेबड़-जावरा मार्ग का निर्माण और रखरखाव मे. वेस्टर्न एमपी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड टोल रोड्स प्रालि द्वारा किया जा रहा है।
1461 कराड़ रुपये की वसूली
जावरा-नयागांव मार्ग का कार्य मे. जावरा-नयागांव टोल रोड कंपनी प्रालि द्वारा किया जा रहा है। याचिका में कहा था कि लेबड़-जावरा सड़क पर लगभग 605 करोड़ रुपये की लागत के मुकाबले 1300 करोड़ रुपये से अधिक टोल वसूला जा चुका है। इसी तरह जावरा-नयागांव सड़क पर 450 करोड़ रुपये की लागत के मुकाबले करीब 1461 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है, बावजूद इसके वसूली जारी है।
उक्त जनहित याचिका में शासन की ओर से कहा गया था कि ये परियोजनाएं बिल्ड, आपरेट एंड ट्रांसफर (बीओटी) मॉडल पर 25 वर्ष की रियायती अवधि के तहत दी गई हैं। इस अवधि में संबंधित कंपनियों को सड़क के निर्माण, संचालन, रखरखाव और टोल वसूली का अधिकार होता है। शासन के तर्क को मानते हुए कोर्ट ने आठ अप्रैल 2022 को याचिका निरस्त कर दी थी। हाई कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता पारस सकलेचा ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को दोबारा सुनवाई के लिए हाई कोर्ट भेज दिया। इसके बाद अब याचिका पर दोबारा सुनवाई शुरू हुई है। गुरुवार को हुई सुनवाई में एडवोकेट खंडेलवाल ने तर्क रखा कि याचिका में दोनों निर्माण एजेंसियों को पक्षकार बनाया जाना अनिवार्य है। याचिकाकर्ता स्वयं हमदस्ती नोटिस तामिल कराने को तैयार हैं। उन्होंने इस संबंध में आवेदन भी दिया है। इस पर कोर्ट ने आवेदन स्वीकारते हुए हमदस्ती नोटिस के आदेश दिए।
Source link
#मधय #परदश #म #लबड #स #जवर #और #जवर #स #नयगव #सडक #पर #लगत #स #कई #गन #जयद #वसल #फर #भ #चल #रह #टल



Post Comment