ग्रामीणों ने बताई व्यथा
कछार के ग्रामीणों ने बताया कि वे यहां वर्षों से रह रहे है। उनके गांव में केवल पांच लोगों के मकान पीएम आवास योजना के तहत बनाए गए हैं। शेष परिवारों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है। कभी कभार गांव में पंचायत प्रतिनिधि आते हैं, उनका कहना रहता है कि सर्वे कराकर इस बार नाम जोड़ दिया गया है।
सामग्री ले जाने की परेशानी
जिले की अंतिम सीमा, जंगल व पहाड़ी पर वनग्राम कछार बसा है। यहां मकान निर्माण सामग्री लेकर जाने में परेशानी होती है। आदिवासी समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि हालात जो भी हो, शासन के नियम हंै कि कच्चे मकान में रहने वाले गरीबों को पीएम आवास योजना का लाभ दिया जाए। लेकिन योजना शुरू हुए इतने वर्ष बाद भी कछार में योजना का लाभ नहीं मिल पाना, जिम्मेदारों की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
वर्सन
वनग्राम कछार में बहुत पहले वन विभाग ने आदिवासियों के मकान बनवाए थे। उस समय राशि कम थी, कच्चे मकान बनाए गए हंै। पूर्व में दूसरे सरपंच का कार्यकाल रहा है। मेरे कार्यकाल में जो आदिवासी छूट गए हैं, थेएउनका सर्वे कराकर नाम जोड़ दिया गया हैं।
उमेश पटले, सरपंच जमुनिया
वनग्राम कछार में पांच आदिवासी के मकान में बने हंै। जिनके आवास नहीं बने थे, उनके नाम सर्वे में जोड़ दिए हंै।
मनीष राणा, सचिव जमुनिया
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