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Dhar Bhojshala: भोजशाला केस की नियमित सुनवाई शुरू, हिंदू पक्ष ने कहा- यह देवी सरस्वती का मंदिर, मुस्लिम पक्ष ने बताई मस्जिद

Dhar Bhojshala: भोजशाला केस की नियमित सुनवाई शुरू, हिंदू पक्ष ने कहा- यह देवी सरस्वती का मंदिर, मुस्लिम पक्ष ने बताई मस्जिद

धार के भोजशाला विवाद मामले में सोमवार को मप्र हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई हुई। हाई कोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने पांच याचिकाओं को एक साथ सुना। कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता आशीष गोयल की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन और विनय जोशी ने पैरवी की। हिंदू पक्ष के वकील ने कहा कि भोजशाला देवी सरस्वती का मंंदिर है और यह ऐतिहासिक स्मारक मस्जिद कतई नहीं हो सकता। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने अपनी दलीलों में कहा कि यह 11 वीं सदी का स्मारक हैं, जो पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित कमाल मौला मस्जिद है। 

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें क्रमिक रूप से सुनी। हिंदू पक्ष के वकील जैन ने कहा कि ऐतिहासिक रिकॉर्ड,ए एएसआई की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट और याचिका में पेाश दस्तावेजों से साबित होता है कि भोजशाला मूल रूप से देवी सरस्वती का मंदिर है। परिसर में हिंदू देवताओं की प्रतिमाएं, संस्कृत में वर्णन और हवन कुंड मिलना यह दर्शाता है कि यह स्मारक मस्जिद नहीं हो सकता। यह स्मारक 1034 में परमार राजवंश के राजा भोज द्वारा बनवाए गए एक हिंदू परिसर का हिस्सा है।  उन्होंने कहा कि मुस्लिम आक्रमणकारियों ने धार पर कई हमले किए थे, इसी दौरान भोजशाला परिसर से हिंदू प्रतीकों को नष्ट करने के प्रयासों के सबूत आज भी मौजूद हैं। 

वकीलों ने यह भी कहा कि मुस्लिम समाज के लोग पहले स्वयं इसे राजा भोज का मदरसा बताते थे। उन्होंने तर्क रखा कि भोजशाला में मां सरस्वती की प्रतिमा थी, जो वर्तमान में लंदन के एक संग्रहालय में रखी हुई है। उसे भारत वापस लाकर भोजशाला में स्थापित किया जाना चाहिए और वहां नमाज पढ़ने पर रोक लगाई जानी चाहिए। साथ ही, हिंदू समाज को बिना किसी प्रतिबंध के प्रतिदिन पूजा की अनुमति दी जानी चाहिए।

दो घंटे चली बहस, आज भी सुनवाई

करीब दो घंटे चली बहस के दौरान मुस्लिम पक्ष के एक वकील ने हिंदू पक्ष द्वारा पेश सभी दस्तावेजों की एक प्रतिलिपि उन्हें उपलब्ध कराने की मांग की। हाईकोर्ट ने इसी मंजूरी देते हुए कहा कि दलीलें पूर्ण होने के बाद सभी पक्ष अपनी आपत्तियां पेश कर सकते हैं, हाईकोर्ट उन पर विचार करेगी। भोजशाला मामले की सुनवाई कर रही डबल बेंच ने कहा कि वह मंगलवार को भी सुनवाई जारी रखेगी। 

गौरतलब है कि हाई कोर्ट के निर्देश पर एएसआई ने 98 दिनों तक भोजशाला का सर्वे किया था और दो हजार से अधिक पन्नों की रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की गई। पिछली सुनवाई में मुस्लिम पक्ष ने इस रिपोर्ट पर सवाल उठाए थे। एक पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सर्वे के दौरान की गई वीडियोग्राफी और रंगीन चित्रों की मांग भी की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था।

 

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