इंदौर प्रेस क्लब के 64वें स्थापना दिवस और वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र माथुर की पुण्यतिथि के मौके पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें ‘इंदौर घराने की पत्रकारिता’ पर किस्सागोई की गई। परिचर्चा में राहुल बारपुते और राजेंद्र माथुर जैसे वरिष्ठ लोगों के साथ काम कर चुके पत्रकारों ने अपने किस्से साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता को मजबूत करने में इंदौर घराने की पत्रकारिता की बड़ी भूमिका रही है।
वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिंदुस्तानी ने कहा कि राजेंद्र माथुर के साथ मुझे दो बार काम करने का मौका मिला। वे काफी सरल और सहज थे लेकिन लेखनी उनकी तीखी थी। कई बार संकट के समय उन्होंने अपने सहयोगियों का बचाव किया। वे कहते थे कि हर विषय में दखल रखें और लगातार अध्ययन करें।
वरिष्ठ पत्रकार सतीश जोशी ने कहा कि इंदौर घराने के प्रतिष्ठा निर्भीक, संवेदनशील और निष्पक्ष पत्रकारिता के कारण है। देश काल परिस्थिति के अनुसार अब पत्रकारिता के आयाम बदले हैं। अब पत्रकारिता भी सोशल मीडिया से प्रभावित है लेकिन इस दौर में भी इंदौर की पत्रकारिता अच्छी है, ये भागीरथपुरा कांड की रिर्पोटिंग से साबित हो गया है।
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वरिष्ठ पत्रकार अरविंद तिवारी ने बताया कि पत्रकारिता के इंदौर घराने की देश में प्रतिष्ठा है। दिल्ली की पत्रकारिता को मजबूत करने में इंदौर घराने की बड़ी भूमिका रही है।
पत्रकार प्रवीण शर्मा ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता में इंदौर घराने का खासा योगदान रहा है। राजेंद्र माथुर यदि राजेंद्र माथुर बन पाए तो उसमें अखबार के प्रबंधन का योगदान है। उन्हें संपादक के तौर पर स्वतंत्र फैसले लिए। उनके दौर में निष्पक्ष खबरें अखबार में लिखी जाती थीं। खबरों को लेकर उस दौर में भी दबाव आते थे लेकिन उन्होंने उसका तनाव पत्रकारों तक नहीं आने दिया। स्वागत भाषण प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक कर्दम ने किया। कार्यक्रम का संचालन प्रदीप जोशी ने किया। आभार मुकेश तिवारी ने माना।
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