भोजशाला मामले में शुक्रवार को सुनवाई हुई जिसमें आवेदक अंतर सिंह व अन्य की याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने कहा कि भोजशाला परिसर का उपयोग हिंदू और मुस्लिम समुदाय अपनी प्रार्थना पद्धति के लिए करते हैं। बसंत पंचमी जब शुक्रवार को आती है तो टकराव जैसी स्थिति निर्मित हो जाती है। भविष्य में इस तरह की स्थिति निर्मित न हो इसके लिए उच्च स्तरीय आयोग बने या फिर कोई नियम तय हो। कोर्ट ने कहा कि यह याचिका सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने से जुड़ी है।
उधर कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के वकील से भी कहा कि वे भी अपना पक्ष रखने के लिए स्वतंत्र हैं। अब अगली सुनवाई को भी याचिकाकर्ता अपना पक्ष रखेंगे। आपको बता दें कि पिछले साल कोर्ट के निर्देश पर एएसआई ने 98 दिन तक भोजशाला का सर्वे किया था और दो हजार से ज्यादा पेज की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की है।
जिसमें बताया गया कि भोजशाला का निर्माण 11वीं शताब्दी के आसपास किया गया। बाद में उसमें तोड़फोड़ भी की गई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भित्ति चित्रों पर संस्कृत श्लोक, देवी देवता की मूर्तियाँ और हिंदू प्रतीक चिह्न भी हैं। इस रिपोर्ट पर मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति ली है और सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी।
कोर्ट ने तब इस याचिका पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था। अब सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट जाने वाले याचिकाकर्ता को भी अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। भोजशाला को लेकर पांच याचिकाएं लगी हैं जिस पर बारी बारी से सुनवाई हो रही है और कोर्ट पक्षकारों को अपने तर्क रखने का मौका दे रही है।
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