नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। जनगणना 2027 की तैयारियों के तहत जिले में मकानों की गणना का पहला चरण एक मई से शुरू हो गया है। इस बार प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाई गई है, जिसमें प्रगणक (एन्यूमरेटर) पहले अपने-अपने क्षेत्रों का भ्रमण कर ब्लाक की पहचान करेंगे और उसके बाद निर्माणों की गिनती शुरू करेंगे।
प्रशासन का लक्ष्य है कि एक-एक मकान और उससे जुड़ी बुनियादी जानकारी का सटीक डेटा तैयार किया जाए, जिससे भविष्य की योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके।
5934 ब्लॉक में बांटा गया जिला
मकानों की गणना के लिए जिले को 5934 ब्लाक में विभाजित किया गया है। पहले तीन दिनों तक प्रगणक अपने-अपने ब्लाक का क्षेत्र भ्रमण करेंगे। इस दौरान ऑनलाइन मैपिंग के जरिए नजरी नक्शा तैयार किया जाएगा, ताकि कोई भी मकान छूट न जाए। इसके बाद एक से 30 मई तक निर्माणों की गणना की जाएगी।
पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन
इस बार गणना की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होगी। प्रगणक द्वारा एकत्रित किया गया डेटा जैसे ही सेव किया जाएगा, वह सीधे अधिकारियों तक पहुंच जाएगा और तत्परता से पोर्टल पर अपलोड हो जाएगा। इससे डेटा संग्रहण में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित होगी।
34 प्रश्नों के जवाब देंगे नागरिक
मकानों की गणना के दौरान नागरिकों को कुल 34 प्रश्नों के उत्तर देने होंगे। इसमें मकान की स्थिति, परिवार के सदस्यों की संख्या, सुविधाओं की उपलब्धता और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी जानकारियां शामिल होंगी। इसके लिए परिवार का कोई एक सदस्य जानकारी दे सकता है।
छह हजार प्रगणक और 1200 सुपरवाइजर तैनात
जनगणना कार्य को सफल बनाने के लिए जिले में करीब छह हजार प्रगणकों और 1200 से अधिक सुपरवाइजरों को प्रशिक्षण दिया गया है। पहले से ही दस लाख से अधिक मकानों की नंबरिंग की जा चुकी है, जिसके आधार पर ब्लाक बनाए गए हैं।
स्वयं गणना का भी मिला विकल्प
इस प्रक्रिया से पहले 15 से 30 अप्रैल तक नागरिकों को स्वयं गणना (Self Enumeration) का विकल्प दिया गया था। इस दौरान 16,577 लोगों ने स्वयं जानकारी दर्ज की, जिनमें से 13,778 की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जिन लोगों ने स्वयं गणना की है, उन्हें प्रगणक को अपनी आईडी बतानी होगी।
जनगणना से होंगे कई फायदे
इस सर्वे के माध्यम से रियल-टाइम डेटा तैयार होगा, जिससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की सटीक स्थिति का आकलन किया जा सकेगा। इसके अलावा डिजिटल कनेक्टिविटी, आपदा जोखिम, आवास की स्थिति और संसाधनों की उपलब्धता का भी विश्लेषण होगा, जिससे विकास योजनाओं को प्रभावी बनाया जा सकेगा।
नागरिकों के लिए जरूरी निर्देश
गणना के दौरान किसी भी प्रकार के दस्तावेज दिखाने या देने की आवश्यकता नहीं होगी। प्रगणक केवल जानकारी दर्ज करेंगे। नागरिकों को केवल मोबाइल नंबर देना होगा, किसी भी प्रकार का ओटीपी साझा नहीं करना है। किरायेदारों और परिवार के सभी सदस्यों की जानकारी भी दर्ज की जाएगी।
फरवरी 2026 में होगी जनसंख्या गणना
मकानों की गणना के बाद अगले चरण में एक से 28 फरवरी 2026 के बीच जनसंख्या की गणना की जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया देश के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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