टीकमगढ़ के नगदा बम्होरी स्थित राजेंद्र सागर बांध की बंधान पर शनिवार को पद्म भूषण पंडित बनारसी दास चतुर्वेदी की पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर उनके ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए एक नया शिलालेख लगाया गया। कार्यक्रम में उन मजदूरों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया जिन्होंने इस बांध के निर्माण में अपना श्रम दिया था। राष्ट्रपति से मांग कर स्वीकृत कराया था बांध डिप्टी रेंजर संजय शर्मा ने बताया कि राज्यसभा सांसद रहते हुए पंडित बनारसी दास चतुर्वेदी ने देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद से टीकमगढ़ के किसानों के लिए सिंचाई बांध की मांग की थी। डॉ. प्रसाद के निर्देश पर ही इस बांध का निर्माण हुआ, जिसे ‘राजेंद्र सागर बांध’ नाम दिया गया। पंडित चतुर्वेदी टीकमगढ़ राज परिवार के आग्रह पर लंबे समय तक कुंडेश्वर में रहे थे। कलेक्टर के निर्देश पर पंचायत ने लगाया शिलालेख पंडित चतुर्वेदी के पोते डॉ. निखिल चतुर्वेदी ने पिछले वर्ष जयंती कार्यक्रम के दौरान नया शिलालेख लगाने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद कलेक्टर विवेक श्रोतिय के निर्देश पर जुडावन पंचायत के सरपंच मोहनलाल चढ़ार ने रेस्ट हाउस के समीप नया शिलालेख तैयार करवाया। इसमें बांध के इतिहास और पंडित चतुर्वेदी के प्रयासों का संक्षिप्त विवरण अंकित किया गया है। 75 पैसे की मजदूरी करने वाले श्रमिक हुए सम्मानित कार्यक्रम के दौरान बांध निर्माण से जुड़े दो वरिष्ठ मजदूरों, मुल्ले चढ़ार और मल्लू पाल को ग्रामीणों की उपस्थिति में सम्मानित किया गया। इन मजदूरों ने बताया कि उन्होंने मात्र 75 पैसे की दैनिक मजदूरी पर इस विशाल बांध का निर्माण कार्य किया था। डिप्टी रेंजर संजय शर्मा ने बताया कि शिलालेख के माध्यम से अब भावी पीढ़ियां बांध निर्माण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और पंडित चतुर्वेदी के योगदान से परिचित हो सकेंगी।
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