अमर उजाला फाउंडेशन के ‘अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति 2025’ समारोह के तहत बुधवार शाम राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के दिल्ली स्थित आवास पर मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में उपसभापति हरिवंश ने छात्रवृत्ति योजना की सफलता और शिक्षा के महत्व पर विस्तार से बात की। उन्होंने अमर उजाला के नवोन्मेषक स्वर्गीय अतुल माहेश्वरी की दूरदर्शिता की सराहना की। उन्होंने कहा कि अखबार उद्योग में ऐसे दूरदर्शी लोग बहुत कम होते हैं। उन्होंने छात्रवृत्ति योजना को सराहनीय पहल बताया, जो बच्चों के भविष्य को संवारने में अहम भूमिका निभा रही है।
उपसभापति ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि अमर उजाला अखबार सिर्फ खबरें ही नहीं देता, बल्कि समाज के लिए कई महत्वपूर्ण सामाजिक कार्य भी करता है। अमर उजाला देश का एकमात्र ऐसा अखबार है, जो समाज के हित में बड़े स्तर पर काम करने के लिए जाना जाता है। उन्होंने छात्रों से अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब वह पहली बार गांव से दिल्ली में आए तब उन्होंने बस में सफर किया। इस दौरान उनके 50 पैसे गिर गए थे। यह घटना आज भी उन्हें संघर्ष के दिनों की याद दिलाती है।
उन्होंने कहा कि जो छात्र पहली बार किसी नए शहर में जाकर कुछ करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें संघर्ष से घबराना नहीं चाहिए। गांव से आने वाले छात्रों को डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि गांव ही उन्हें संघर्ष की असली ताकत देता है। गांव से मिली सीख और मजबूती ही आगे बढ़ने की प्रेरणा बनती है।
हौसला बनाए रखना जरूरी
उपसभापति ने छात्रों से कहा, जीवन में आगे बढ़ने के लिए हौसला बनाए रखना जरूरी है। अगर हिम्मत बनी रहेगी, तो इंसान और आगे तक पहुंच सकता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प उनकी पीढ़ी को लेना होगा। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ खुद को भी बदलना जरूरी है, तभी नई दुनिया को समझा और देखा जा सकता है। जीवन में कोई शॉर्टकट नहीं होता है। इसलिए सफलता पाने के लिए मेहनत पर ही ध्यान दें।
छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए उपसभापति ने कहा कि जो लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें मुफ्त सुविधाएं देना सही है, लेकिन जो लोग इन योजनाओं का लाभ लेकर आगे बढ़ चुके हैं, उन्हें एक सीमा के बाद स्वेच्छा से इन सुविधाओं को छोड़ देना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई लोगों ने स्वेच्छा से गैस सब्सिडी छोड़ी है, जिससे जरूरतमंद लोगों को अधिक फायदा मिल सका। ऐसी पहल से उन लोगों तक मदद पहुंचती है, जिन्हें वास्तव में इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है। उन्होंने जोर दिया कि जनता के बीच से ही अपने जनप्रतिनिधियों से यह सवाल उठना चाहिए कि मुफ्त सुविधाओं के लिए पैसा कहां से आएगा। तभी इस पर संतुलन और नियंत्रण संभव हो सकेगा।
उन्होंने कहा कि आज के समय में स्किल बेहद जरूरी हो गई है। जिस भी क्षेत्र में काम करना हो, वहां कौशल होना जरूरी है। आज देशभर में बड़ी संख्या में स्किल सेंटर खोले गए हैं। इसका सकारात्मक असर भी देखने को मिल रहा है। नई स्किल के जरिए भारत को और मजबूत और चमकदार बनाया जा सकता है। साथ ही, कौशल के दम पर व्यक्ति का जीवन भी बदल सकता है और देश आगे बढ़ सकता है।
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