ट्रैफिक पुलिस ने हेलमेट नहीं पहनने वालों के खिलाफ 12,601 चालान बनाए और 37.80 लाख रुपये से अधिक शुल्क वसूला। 240 मामलों को लाइसेंस निलंबन के लिए परिवहन …और पढ़ें
HighLights
- ट्रैफिक पुलिस की सख्ती के बावजूद शहर में सड़क सुरक्षा नियमों की लगातार अनदेखी
- 240 मामलों को लाइसेंस निलंबन के लिए परिवहन विभाग को भेजा गया
- वाहन चालक हेलमेट को सुरक्षा नहीं, बल्कि केवल चालान से बचने का साधन मानते हैं
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर में हेलमेट पहनने को लेकर ट्रैफिक पुलिस की सख्ती लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद भी शहरवासियों की आदतें बदलती नजर नहीं आ रहीं। 26 अप्रैल से 10 मई 2026 तक चलाए गए विशेष अभियान में ट्रैफिक पुलिस ने हेलमेट नहीं पहनने वालों के खिलाफ 12,601 चालान बनाए और 37.80 लाख रुपये से अधिक का समन शुल्क वसूला गया। इतना ही नहीं, 240 मामलों को लाइसेंस निलंबन के लिए परिवहन विभाग को भेजा गया।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि नियम तोड़ने वालों में केवल दोपहिया चालक ही नहीं, बल्कि महिलाएं और पीछे बैठने वाले लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों के अनुसार शहर में अब भी बड़ी संख्या में वाहन चालक हेलमेट को सुरक्षा नहीं, बल्कि केवल चालान से बचने का साधन मानते हैं। यही कारण है कि कार्रवाई के बाद कुछ दिनों तक नियमों का पालन बढ़ता है, लेकिन फिर हालात पहले जैसे हो जाते हैं। सड़कों पर ज्यादातर वाहन चालक बिना हेलमेट पहने ही वाहन चलाते हुए नजर आते हैं।
औसतन 840 से ज्यादा बनाए चालान
अभियान के दौरान हर दिन औसतन 840 से ज्यादा चालान बनाए गए। यानी हर घंटे 35 से अधिक वाहन चालक हेलमेट नियम तोड़ते हुए पकड़े गए। शहर के पलासिया, विजय नगर, रामचंद्र नगर, चाणक्युपरी, महूनाका, भंवरकुआं, एमआर-10, बायपास और कालेज क्षेत्रों में सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि युवाओं के साथ-साथ अब महिलाओं और परिवार के साथ सफर करने वाले लोग भी हेलमेट नियमों को गंभीरता से नहीं ले रहे।
पीछे बैठने वालों में ज्यादा लापरवाही
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार पीछे बैठने वाले यात्रियों में हेलमेट को लेकर जागरूकता बेहद कम है। महिलाएं अक्सर यह मानकर हेलमेट नहीं पहनतीं कि छोटी दूरी में जोखिम कम होता है, जबकि हादसों में सबसे ज्यादा सिर में चोट ही जानलेवा साबित होती है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि शहर में हेलमेट पहनने की संस्कृति अभी पूरी तरह विकसित नहीं हो सकी है। कई लोग महंगी बाइक और मोबाइल तो खरीद लेते हैं, लेकिन अच्छी गुणवत्ता का हेलमेट नहीं लेते। दूसरी ओर बाजार में बिना आईएसआई मार्क वाले सस्ते हेलमेट भी बड़ी संख्या में बिक रहे हैं।
15 दिन में क्या-क्या हुआ
- 12,601 हेलमेट चालान
- 37.80 लाख रुपये समन शुल्क
- 240 लाइसेंस निलंबन के लिए भेजे गए
- रोज औसतन 840 चालान
- हर घंटे 35 से ज्यादा कार्रवाई
क्यों नहीं बदल रही आदत?
- छोटी दूरी में हेलमेट जरूरी नहीं मानना
- पीछे बैठने वालों में जागरूकता की कमी
- चालान से बचने तक सीमित सोच
- बिना आईएसआई हेलमेट का इस्तेमाल
- युवाओं में स्टाइल बनाम सुरक्षा मानसिकता
यातायात के नियमों को लेकर चलता रहेगा जागरूकता अभियान
26 अप्रैल से 10 मई तक यातायात विभाग ने विशेष अभियान चलाया। आगे भी यातायात के नियमों की जागरूकता फैलाने को लेकर लगातार अभियान चलता रहेगा। विभाग स्कूलों, कालेजों सहित अन्य संस्थानों के साथ चौराहों पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। -राजेश त्रिपाठी, डीसीपी, ट्रैफिक
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