रेलवे ने ट्रैक मरम्मत और देखरेख से जुड़ी मशीनों के संचालन और मेंटेनेंस को लेकर बड़ा फैसला लिया है। …और पढ़ें
HighLights
- रेलवे ट्रैक मशीनों का संचालन अब निजी एजेंसी करेगी
- दो साल की परियोजना पर 16.76 करोड़ रुपये खर्च होंगे
- ट्रेनों की सुरक्षा और समयपालन में होगा सुधार
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। रेलवे ने ट्रैक मरम्मत और देखरेख से जुड़ी मशीनों के संचालन और मेंटेनेंस को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब यह जिम्मेदारी निजी एजेंसी को सौंपी जाएगी। रेलवे का मानना है कि इससे ट्रैक मेंटेनेंस का काम अधिक तेज, व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से हो सकेगा।
16.76 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे
जानकारी के अनुसार इस परियोजना पर करीब 16.76 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना को अगले 24 महीनों यानी दो वर्षों में पूरा किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि मशीनों की बेहतर देखरेख से ट्रैक मरम्मत कार्य में रुकावट कम आएगी और काम की गति बढ़ेगी।
आधुनिक मशीनों पर निर्भर है ट्रैक सुरक्षा
रेलवे ट्रैक की मरम्मत और रखरखाव के लिए ट्रैक पैकिंग मशीन, बैलास्ट क्लीनिंग मशीन और अन्य आधुनिक तकनीकी उपकरणों का उपयोग करता है। ये मशीनें रेलवे ट्रैक को मजबूत और सुरक्षित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
हालांकि समय पर मरम्मत और तकनीकी देखभाल नहीं होने के कारण कई बार मशीनें खराब हो जाती थीं, जिससे ट्रैक मेंटेनेंस कार्य प्रभावित होता था। इसी समस्या को देखते हुए रेलवे ने विशेषज्ञ निजी एजेंसी की सेवाएं लेने का निर्णय किया है।
यात्रियों को होगा सीधा फायदा
रेलवे के अनुसार इस योजना से ट्रैक मरम्मत का कार्य तय समय पर पूरा हो सकेगा, जिससे ट्रेनों की लेटलतीफी कम होने की उम्मीद है। साथ ही ट्रैक की गुणवत्ता और सुरक्षा में सुधार होगा, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना भी घटेगी।
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