हर साल बारिश आते ही पूरा शहर जलमग्न हो जाता है। सड़कों पर ट्रैफिक जाम लग जाता है और वाहन घंटों रेंगते रहते हैं। इसके साथ शहर के निचले इलाकों वाली बस्तियों में भी हर साल सैकड़ों घर पानी में डूब जाते हैं। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए इस साल प्रशासन बारिश से पहले ही अलर्ट पर है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने नगर पालिक निगम के अधिकारियों को विशेष रूप से इसके लिए निर्देशित किया है। उन्होंने कलेक्टर कार्यालय में हुई बैठक में कहा कि शहर के सभी छोटे-बड़े नालों, पानी की निकासी वाले चैनलों, तालाबों के आसपास के क्षेत्रों तथा जलभराव की आशंका वाले निचले स्थलों की समय रहते साफ-सफाई पूरी कर ली जाए। इसके साथ ही स्टॉर्म वॉटर लाइन और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई को प्राथमिकता के आधार पर करने को कहा गया है ताकि भारी बारिश के दौरान शहर के किसी भी हिस्से में जलभराव की स्थिति निर्मित न हो सके।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी वर्षा ऋतु के दौरान होने वाली अतिवृष्टि और बाढ़ जैसी आपातकालीन स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटना था। बैठक में नगर निगम, पुलिस प्रशासन, होमगार्ड और एसडीआरएफ सहित सभी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित थे। इस उच्च स्तरीय बैठक में इंदौर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. परीक्षित झाडे़, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सिद्धार्थ जैन के साथ-साथ अपर कलेक्टर नवजीवन विजय पवार, रोशन राय और रिंकेश वैश्य ने भी सहभागिता की और जिले की सुरक्षा व्यवस्थाओं का खाका तैयार किया।
ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा और एसडीआरएफ को मुस्तैदी के निर्देश
कलेक्टर ने ग्रामीण क्षेत्रों की समीक्षा करते हुए कहा कि ऐसे मार्ग जहां पुलिया नहीं हैं या जो जलभराव के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं, वहां अनिवार्य रूप से चेतावनी संकेतक लगाए जाएं। इसके अलावा उन संवेदनशील स्थानों पर आपदा के समय कर्मचारियों की विशेष ड्यूटी लगाई जाए, जिससे किसी भी प्रकार की अप्रिय दुर्घटना को रोका जा सके। बैठक में उपस्थित एसडीआरएफ और होमगार्ड के दलों को राहत एवं बचाव कार्यों के लिए अपने सभी आधुनिक संसाधनों के साथ चौबीस घंटे तैयार रहने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने वालंटियर्स की विशेष ट्रेनिंग, समय-समय पर मॉक ड्रिल और रेस्क्यू अभ्यास नियमित रूप से आयोजित करने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले वर्ष चिन्हित किए गए जलभराव वाले पुराने स्थलों पर इस बार विशेष निगरानी रखी जाएगी और आवश्यकता के अनुसार नए संवेदनशील क्षेत्रों को भी सूची में शामिल कर पूर्व में गठित विशेष टीमों को सक्रिय रखा जाएगा।
सड़कों की मरम्मत और राहत शिविरों के लिए विशेष दिशा-निर्देश
सड़कों की स्थिति पर बात करते हुए कलेक्टर वर्मा ने सभी सड़क निर्माण एजेंसियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि वर्षा ऋतु शुरू होने से पहले सभी आवश्यक पैचवर्क, डामरीकरण और सड़कों की मरम्मत का कार्य हर हाल में पूर्ण कर लिया जाए, ताकि बारिश के समय गड्ढों और जलभराव के कारण जनता को परेशानी न हो। इन सभी विकास कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग और फॉलोअप भी किया जाएगा। बैठक के दौरान आपातकालीन स्थिति में बनाए जाने वाले राहत स्थलों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि यदि अचानक आवश्यकता पड़ती है, तो राहत शिविर तत्काल प्रभाव से शुरू किए जा सकें, इसके लिए भोजन, दवाइयां और ठहरने की सभी व्यवस्थाएं पहले से ही पुख्ता रखी जाएं। इसके अलावा पर्यटन और पिकनिक स्थलों पर विशेष निगरानी रखने, पुल-पुलियों पर संकेतक लगाने, जलमग्न होने वाली खदानों तथा ईंट भट्ठों के आसपास बैरिकेडिंग कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही मानसून के दौरान निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए रखने और पशुपालन विभाग को ग्रामीण इलाकों में विशेष शिविर लगाकर पशुओं के टीकाकरण का अभियान चलाने के लिए भी निर्देशित किया गया है।
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