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इंदौर में 2013 से कर रहे कुत्तों की नसबंदी हो रही, फिर भी नहीं हो पा रहा नियंत्रण

इंदौर में 2013 से कर रहे कुत्तों की नसबंदी हो रही, फिर भी नहीं हो पा रहा नियंत्रण

इंदौर में श्वानों की नसबंदी वर्ष 2013-14 से की जा रही है। दावा है कि अब तक दो लाख 15 हजार से ज्यादा श्वानों की नसबंदी की जा चुकी है। …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 20 May 2026 08:33:51 AM (IST)Updated Date: Wed, 20 May 2026 08:33:51 AM (IST)

कुत्तों पर नहीं हो पा रहा है नियंत्रण। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. डॉग शेल्टर होम के लिए अब तक तय नहीं हुई एजेंसी
  2. दावा है कि अब तक दो लाख 15 हजार से ज्यादा श्वानों की नसबंदी की जा चुकी है
  3. 40 हजार से ज्यादा श्वान हैं जिनकी नसबंदी होना बाकी है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर में श्वानों की नसबंदी का कार्यक्रम वर्ष 2013-14 से चल रहा है। दावा है कि अब तक दो लाख 15 हजार से ज्यादा श्वानों की नसबंदी की जा चुकी है और 40 हजार से ज्यादा श्वान हैं जिनकी नसबंदी होना बाकी है।

चौंकाने वाली बात यह है कि इन सबके बावजूद शहर में श्वानों के काटने के मामले लगातार बढ रहे हैं। पिछले एक वर्ष में 60 हजार से ज्यादा लोगों को श्वान ने काटा है। वर्तमान में इंदौर में दो एजेंसियां श्वानों की नसबंदी का काम देख रही हैं। रोजाना 40-50 श्वानों की नसबंदी का दावा किया जा रहा है।

जहां से उठाते हैं, वहीं छोड़ रहे

शहर में ट्रेंचिंग ग्राउंड और छावनी ये दो स्थान हैं जहां श्वानों की नसबंदी की जा रही है। इस काम में लगी एजेंसियां श्वानों को मोहल्ले, बस्तियों से पकड़कर नसबंदी केंद्र लेकर आती हैं और फिर यहां नसबंदी के बाद उन्हें उसी स्थान पर छोड़ दिया जाता है जहां से उन्हें उठाया था। हुकमचंद पाली क्लिनिक से मिले आंकड़ों के अनुसार शहर में श्वानों के काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। तीन वर्ष पहले तक यह आंकड़ा 32 हजार के आसपास था जबकि पिछले एक वर्ष में श्वानों ने 60 हजार से ज्यादा लोगों को काटा है। यह आंकड़ा सिर्फ सरकारी अस्पतालों का है। कई लोग श्वान काटने के बाद निजी अस्पताल भी पहुंच जाते हैं।

डॉग शेल्टर होम के लिए अब तक एजेंसी ही तय नहीं हुई

चौकाने वाली बात यह भी है कि नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने शहर की सड़कों से खतरनाक श्वानों को हटाने का अंतरिम आदेश दिया था। इसके बाद नगर निगम ने ट्रेंचिंग ग्राउंड पर डाग शेल्टर होम तैयार करने की योजना बनाई थी, लेकिन यह अब तक मूर्तरूप नहीं ले सकी। निगम का एक छोटा डाग शेल्टर होम है, लेकिन इसकी क्षमता बहुत कम है।

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