यह पहला मौका है, जब धार की भोजशाला में शुक्रवार को नमाज नहीं पढ़ी जाएगी और महाआरती होगी। उच्च न्यायालय में धार भोजशाला को लेकर आए फैसले के बाद यह स्थिति बनी है। ठीक एक सप्ताह पहले भोजशाला में आखिरी बार नमाज पढ़ी गई थी। हालांकि, धार भोजशाला को लेकर आए उच्च न्यायालय के फैसले को मुस्लिम पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है और रात साढ़े आठ बजे विशेष अनुमति याचिका दायर की गई है। शुक्रवार को इस याचिका पर सुनवाई हो सकती है।
उधर, शुक्रवार को कानून-व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए धार प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद है। गुरुवार को धार में ध्वज मार्च निकाला गया और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से कानून हाथ में न लेने की चेतावनी दी।
कमाल मौला मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष अब्दुल समद का कहना है कि मस्जिद परिसर में 700 वर्षों से जुमे की नमाज अदा की जा रही है। उन्होंने कहा, “हम संविधान के दायरे में रहकर ही काम करेंगे। हमारे पास मस्जिद को लेकर मजबूत कानूनी साक्ष्य हैं, जिन्हें हम सर्वोच्च न्यायालय में पेश करेंगे। सरकारी अभिलेख और धार रियासत के दस्तावेजों में जमीन मस्जिद के नाम दर्ज है। सरकारी खसरे में भी इसका उल्लेख है। यह बात हम उच्च न्यायालय में भी रख चुके हैं।”
सुरक्षा बल तैनात
शुक्रवार को धार के हालात सामान्य बनाए रखने के लिए भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है। 700 से अधिक पुलिसकर्मी और अन्य सुरक्षा बल निगरानी में लगाए गए हैं। भोजशाला की सुरक्षा को तीन भागों में विभाजित किया गया है। शहर के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी पुलिस बल तैनात रहेगा। धार में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की दो कंपनियां भी तैनात की गई हैं। इसके अलावा आसपास के जिलों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है।
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