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इंदौर के एमआर-10 ब्रिज पर पुराना टोल नाका हटने से बना नया ब्लैक स्पाट, बढ़ रही दुर्घटनाएं

इंदौर के एमआर-10 ब्रिज पर पुराना टोल नाका हटने से बना नया ब्लैक स्पाट, बढ़ रही दुर्घटनाएं

डिवाइडर में कट नहीं होने के कारण वाहन चालकों को सड़क पर करने के लिए 70 से 80 मीटर तक गलत दिशा में आना पड़ता है। ऐसे में दुर्घटना की स्थिति बनती है। …और पढ़ें

Publish Date: Fri, 22 May 2026 07:54:08 AM (IST)Updated Date: Fri, 22 May 2026 07:54:08 AM (IST)

एमआर-10 पुल के पास सभी दिशाओं से वाहन इधर-उधर घुस जाते हैं। (राजू पवार)्

HighLights

  1. सिंहस्थ-2028 में उज्जैन आवागमन के लिए सबसे ज्यादा होगी महत्वपूर्ण सड़क
  2. वाहन चालकों को सड़क पर करने के लिए 70 से 80 मीटर तक गलत दिशा में आना पड़ता है
  3. क्रासिंग के दौरान ब्रिज से आ रहे तेज गति से वाहन चालक यहां आपस में उलझते हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर को ट्रैफिक में नंबर-वन बनाने व ब्लैक स्पाट कम करने की कवायद लगातार चल रही है। एमआर-10 ब्रिज पर पुराने टोल नाका के पास अब एक नया ब्लैक स्पाट बन गया है। ब्रिज पर पिछले कई वर्षाें से बना हुआ टोल नाका हटने से एमआर-10 ब्रिज से वाहन तेज गति से आते हैं, लेकिन डिवाइडर में कट नहीं होने के कारण वाहन चालकों को सड़क पर करने के लिए 70 से 80 मीटर तक गलत दिशा में आना पड़ता है। ऐसे में क्रासिंग के दौरान ब्रिज से आ रहे तेज गति से वाहन चालक यहां आपस में उलझते हैं और दुर्घटना की स्थिति बनती है।

ब्रिज से ही बड़ी संख्या में वाहन चालक न्यू विजय नगर, कालिंदी कुंज सहित अन्य कालोनियों के वाहन चालक आवागम करते हैं। इससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ रही है। जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में भी यह मुद्दा उठा था, तो कलेक्टर ने इंदौर विकास प्राधिकरण और यातायात पुलिस को निराकरण करने के लिए कहा था। एमआर-10 टोल नाका से लवकुश चौराहा तक की सड़क का स्वामित्व आईडीए के पास है। वहीं, यातायात विभाग के जिम्मेदारों के अनुसार एमआर-10 ब्रिज पर प्रीकास्ट लगाकर चौराहा बना दिया है। इससे दुर्घटनाओं में कमी आई है।

सिंहस्थ में सबसे महत्वपूर्ण सड़क होगी साबित

लवकुश चौराहा पर फ्लायओवर बनने और मेट्रो की क्रासिंग के बाद यहां यातायात जरूर कम होगा। सिंहस्थ-2028 के लिए उज्जैन आवागमन के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण सड़क होगी। सिंहस्थ के दौरान सबसे ज्यादा दो, चार वाहनों सहित छोटे-बड़े वाहनों का दवाब भी इसी सड़क पर होगा। हालांकि, आईडीए यहां अभी एमआर-10 ब्रिज को और चौड़ा करने की भी प्लानिंग कर रहा है। यदि वह काम होता है तो यह चौराहा और भी खतरनाक हो सकता है।

डिवाइडर बनाकर कट करना होगा बंद

ब्लैक स्पाट को खत्म करने के लिए ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि इसका सर्वे किया जाना जरूरी है। भविष्य में यहां और ज्यादा यातायात का दबाव बढ़ेगा। दीपमाला ढाबे की ओर से आने वाले वाहनों को होटल की ओर जाने के लिए डिवाइडर से कट देना होगा। ट्रैफिक कंसल्टेंट के माध्यम से मर्जिंग पाइंट पर ट्रैफिक सिग्नल लगाकर चौराहे को व्यवस्थित किया जा सकता है। रात के समय वाहनों की गति पर नियंत्रण के लिए पहले रंबल स्ट्रीप का निर्माण करना होगा। पहले जहां टोल नाका था, वहां डिवाइडर बनाकर एवं ग्रीन बेल्ट का कट बंद करना होगा।

एमआर-10 ब्रिज पर छह लाइन ब्रिज निर्माण

ब्लैक स्पाट में शामिल राऊ गोल चौराहा बन चुका है। रालामंडल वाले में सुधार कर चुके हैं। अर्जुन बड़ौद ब्रिज को शुरू कर चुके है। इसके अलावा अधिकांश ब्लैक स्पाट पर सुधार कार्य कर लिए गए हैं। एमआर-10 ब्रिज पर ब्लैक स्पाट को देखते हुए छह लाइन फ्लाइओवर का निर्माण किया जाएगा। – प्रवीण यादव, प्रोजेक्ट मैनेजर, एनएचएआई

35 प्रतिशत दुर्घटनाओं व मौत में आई कमी

ब्लैक स्पाट को लेकर नगर निगम, आईडीए, एनएचएआई, एमपीआरडीसी द्वारा लगातार सुधार कार्य किए जा रहे हैं। पिछले साल की तुलना में दुर्घटनाओं व मौतों में 35 प्रतिशत तक की कमी आ चुकी है। एमआर-10 ब्रिज प्रीक्रास्ट लगाकर गोल चौराहा बना दिया है, इससे दुर्घटनाओं में लगातार कमी आ रही है। वहीं, शहर में यातायात सुधार को लेकर निरंतर कदम उठाए जा रहे हैं। – राजेश कुमार त्रिपाठी, डीसीसी, ट्रैफिक

इंदौर में एमआर-10 जंक्शन और अर्जुन बड़ौद के लिए फ्लाई एश की समस्या खत्म

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सरीसृपों की बसाहट का कार्य भी किया जा रहा है। प्रदेश में किंग कोबरा लाने के साथ साथ गैंडा लाने की भी तैयारी है। नेशनल पार्कों के आसपास वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर स्थापित किया जा रहे हैं। ताकि, आवश्यकता पड़ने पर वन्य जीवों को त्वरित रूप से इलाज की सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा कि हम मध्य प्रदेश की धरती पर सम्राट विक्रमादित्य का गौरवशाली इतिहास देखते हैं। सम्राट विक्रमादित्य ने अपने नवरात्रों और शासन के बल बूते पर सुशासन की स्थापना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कालखंड भी हमें इस स्वर्णिम दौर की लघु झलक दिखाता है। अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मध्य प्रदेश में मनाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व का आभार मानता हूं। आज का समय हमें जैव विविधता के क्षेत्र में काम करने के लिए सिंहावलोकन का अवसर प्रदान करता है।</p> <p style="text-align: justify"> <p style="float: left;clear: both"> <p style="position:relative;color: #fff"> <img align="" alt="" class="imgCont" height="744" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/full/1779448594-8427.jpeg" style="border: 1px solid #DDD;margin-right: 10px;padding: 1px;float: left;z-index: 0" title="" width="1116" /></p> </p> </p> <p style="text-align: justify"> <strong>प्रकृति को सहेज रहा मध्यप्रदेश-</strong>मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारा वन अमला हाथियों के प्रबंधन के लिए बुलेटिन निकालने जैसे नवाचार कर रहा है। मध्यप्रदेश की धरती पर हाथियों का कुनबा भी तेजी से बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश घड़ियाल स्टेट भी है। चंबल और कूनो नेशनल पार्क में भी घड़ियालों के संरक्षण का कार्य तेजी से हो रहा है। मगर मां नर्मदा का वाहन है, इनके संरक्षण और पुनर्वास की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार जल संरक्षण की दिशा में भी तेजी से कार्य कर रही है। प्रदेश में गुड़ी पड़वा से लेकर गंगा दशहरा तक 3 महीने का जल संरक्षण महा अभियान प्रगति पर है। राज्य में अब तक 3000 करोड़ से 56 हजार जल स्रोतों का जीर्णोद्धार और निर्माण, 827 बावड़ी, 1200 से अधिक तालाब, 212 नदियों में साफ सफाई के कार्य किए गए हैं। इस महा अभियान में प्रदेश के 18 लाख लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हुई है।</p> <p style="text-align: justify">  </p> <p style="text-align: justify"> <strong>जिसे बना नहीं सकते, उसे बिगाड़ें नहीं-</strong>कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण-वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर हम सभी संकल्प लें कि जिसे हम बना नहीं सकते, कम से कम उसे बिगाड़े नहीं। धरती पर उपलब्ध जैव विविधता से हमें भोजन, दवाई और जीवन मिलता है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट चीता में हमने एक वन्यजीव प्रजाति का संरक्षण किया है। चीता घास के मैदानों में रहने वाला वन्यजीव है। उन्होंने कहा कि हम जैव विविधता संरक्षण के कार्य में सर्वे भवन्तु सुखिन: का भाव रखते हैं। जैव विविधता हमारी अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करती है। दुनिया में कितना भी मशीनीकरण आ जाए, लेकिन प्रकृति पर हमारी निर्भरता कभी कम नहीं होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कार्बन उत्सर्जन कम करने के अपने लक्ष्य का 90 प्रतिशत हासिल कर लिया है। वर्ष 2030 तक हम इस लक्ष्य को पूर्ण करेंगे। सदियों से भारत ने प्रकृति से साथ जीवन जीने की परंपरा को आगे बढ़ाया है। मध्यप्रदेश की जनजातियों की जीवन शैली में यह समृद्ध परंपरा साफ नजर आती हैं। हमें प्राकृतिक खेती और प्रकृति को बचाए रखने में सहयोग करना है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुनिया की भीषण त्रासदियों में शामिल भोपाल गैस त्रासदी के अपशिष्ट का संपूर्ण निष्पादन कर पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण कार्य किया है। प्रदेश में चीता संरक्षण के लिए भी बहुत अच्छा कार्य हो रहा है। इसके लिए राज्य सरकार को बधाई देता हूं।</p> <p style="text-align: justify">  </p> <p style="text-align: justify"> <strong>घरों में ही बनाएं छोटा सा जैव विविधता पार्क-</strong>केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा कि जैव विविधता के संरक्षण से भावी पीढ़ियों के पर्यावरण को बचाया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन लाइफ की पहल की है, जिसे विश्वस्तर पर सराहा गया है। पर्यावरण बचाने के लिए देश में स्थानीय स्तर पर 2 लाख से अधिक जैव विविधता समितियां बनाई गई हैं। प्रोजेक्ट चीता दुनिया का पहला इंटर कॉन्टिनेंटल ट्रांसफर है। पयार्वरण की परिस्थितियों में बदलाव के कारण प्रवासी पक्षियों की संख्या तेजी से घटी है। पर्यावरण बचाने के लिए आज हम अपनी बालकनी में पक्षियों के लिए घोसला रखते हैं और पौधे लगाते हैं। हमें एक छोटा जैव विविधता पार्क घरों की बालकनी में बनाना चाहिए। दूसरी ओर, कार्यक्रम में कूनो नेशनल पार्क के निदेशक उत्तम कुमार शर्मा ने प्रजेंटेशन दिया। इसमें उन्होंने बताया कि चीता करीब 4-5 हजार वर्ष से भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा रहा है। श्योपुर के कूनो में पहली बार वर्ष 2022 में नामीबिया से चीते लाए गए थे। भारत में इस साल 18 नए चीतों का जन्म हुआ, जिनमें से 14 अभी फल-फूल रहे है। भारत में जन्मी पहली मादा चीता मुखी भी शावकों को जन्म दे चुकी है। भारत में अब तक चीतों की संख्या कुल 53 है। इन्में से 33 भारत में जन्मे हैं।</p>

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