डाक्टरों ने बताया कि यह बीमारी 20 लाख लोगों में किसी एक व्यक्ति को होती है और इसमें मृत्यु का खतरा भी रहता है। बच्ची को गंभीर हालत में लाया गया था। …और पढ़ें
HighLights
- 20 लाख में एक को होती है यह दुर्लभ बीमारी
- बच्ची को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था
- हालत इतनी नाजुक थी कि उसे तुरंत आईसीयू में भर्ती करना पड़ा
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। दुर्लभ बीमारी एटिपिकल एचयूएस से जूझ रही इंदौर की 9 वर्षीय बच्ची को नया जीवन मिला है। करीब 40 दिनों तक चले उपचार के बाद एमजीएम मेडिकल कालेज के सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल के डाक्टरों ने बच्ची को डिस्चार्ज कर दिया।
डाक्टरों ने बताया कि यह बीमारी करीब 20 लाख लोगों में किसी एक व्यक्ति को होती है और इसमें मृत्यु का खतरा भी रहता है। बच्ची को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। उसके शरीर में खून की कमी थी, प्लेटलेट्स तेजी से गिर चुके थे और किडनी ने लगभग काम करना बंद कर दिया था।
हालत इतनी नाजुक थी कि उसे तुरंत आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। बच्ची को यह बीमारी अनुवांशिक थी और तेजी से शरीर के अंगों को प्रभावित कर रही थी। बच्ची का इलाज प्लाज्माफेरेसिस, स्टेराइड और मोनोक्लोनल एंटीबाडी थेरेपी आदि से किया गया। निजी अस्पताल में इसका इलाज काफी महंगा होता है, यहां बच्ची को निश्शुल्क उपचार की सुविधा मिली है।
दो दिन तक कोमा में रही बच्ची
बच्ची को अत्यधिक अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर हुआ, जिसके कारण उसे पोस्टरियर रिर्वसिबल इनकेफेलोपैथी सिंड्रोम नाम की न्यूरोलाजिकल समस्या हो गई। इसी दौरान उसे दौरे पड़े और वह दो दिनों तक कोमा जैसी स्थिति में रही। नेफ्रोलाजी, पीडियाट्रिक और न्यूरोलाजी विभाग की संयुक्त टीम ने बच्ची का उपचार किया। इलाज का असर धीरे-धीरे दिखाई देने लगा। उसकी किडनी दोबारा सामान्य रूप से काम करने लगी और रक्त संबंधी सभी पैरामीटर भी सुधार पर आने लगे। बच्ची के इलाज में नेफ्रोलाजी विभाग से डा. रितेश कुमार बनोदे, डा. लेखरा, डा. गुल्फाम, हेमेटोलाजी विभाग से डा. अक्षय लाहोटी सहित ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन, नर्सिंग आफिसर आदि का सहयोग रहा।
शरीर की छोटी रक्त नलिकाओं को करती है प्रभावित
विशेषज्ञों ने बताया कि एटिपिकल हेमोलिटिक यूरेमिक सिंड्रोम (एटिपिकल एचयूएस) एक बेहद दुर्लभ और गंभीर बीमारी है, जो शरीर की छोटी रक्त नलिकाओं को प्रभावित करती है। इस बीमारी में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली असामान्य रूप से सक्रिय हो जाती है, जिससे लाल रक्त कणिकाएं टूटने लगती हैं, प्लेटलेट्स तेजी से कम हो जाते हैं और किडनी पर गंभीर असर पड़ता है। यह बीमारी अक्सर अनुवांशिक कारणों से भी होती है। मरीजों में गंभीर एनीमिया, कमजोरी, सूजन, पेशाब कम होना, हाई ब्लड प्रेशर और दौरे जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं।
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