मंदिरों के विकास के लिए 300 करोड़ रुपये के बांड लाने की योजना को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका प्रस्तुत हुई है। कोर्ट मामले में ग्रीष्मावकाश के …और पढ़ें
HighLights
- मामले में ग्रीष्मावकाश के बाद होगी सुनवाई
- प्राधिकरण इस कार्य में 300 करोड़ रुपये खर्च होने की बात कर रहा है
- इसके लिए किसी तरह की कोई प्रशासनिक और वित्तिय स्वीकृति नहीं ली गई है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा सिंहस्थ से पहले अंगारेश्वर महादेव, मंगलनाथ और कालभैरव मंदिरों के विकास के लिए 300 करोड़ रुपये के बांड लाने की योजना को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका प्रस्तुत हुई है। कोर्ट इस मामले में ग्रीष्मावकाश के बाद सुनवाई करेगी।
याचिका उज्जैन निवासी प्रभात मोहन पांडे ने एडवोकेट रोहित शर्मा के माध्यम से प्रस्तुत की है। कहा है कि उज्जैन विकास प्राधिकरण ने इस काम के लिए टेंडर जारी कर दिए, जबकि इसके लिए किसी तरह की कोई प्रशासनिक और वित्तिय स्वीकृति नहीं ली गई है। प्राधिकरण इस कार्य में 300 करोड़ रुपये खर्च होने की बात कर रहा है, लेकिन उसके पास यह पैसा है ही नहीं।
विकास कार्य के लिए आवश्यक जमीन भी अधिग्रहित नहीं की गई
उल्लेखनीय है कि उज्जैन विकास प्राधिकरण ने सिंहस्थ से पहले अंगारेश्वर महादेव, मंगलनाथ और कालभैरव मंदिरों के विकास के लिए 300 करोड़ रुपये के बांड लाने की योजना बनाई है। प्राधिकरण इसके लिए बांड जारी कर पैसा एकत्रित करने का दावा कर रहा है, लेकिन इसके लिए भी अब तक कोई स्वीकृति नहीं ली गई। विकास कार्य के लिए आवश्यक जमीन भी अधिग्रहित नहीं की गई। अंगारेश्वर महादेव मंदिर शिप्रा नदी के तट पर है। यह नदी से 100 मीटर की परिधि में है। इसी को लेकर हाई कोर्ट में याचिका लगाई गई है।
मास्टर प्लान के अनुसार क्षेत्र में किसी तरह का निर्माण नहीं किया जा सकता
मास्टर प्लान के अनुसार इस क्षेत्र में किसी तरह का निर्माण नहीं किया जा सकता। बगैर आर्थिक व्यवस्था, योजना के काम शुरू करने की तैयारी है। मंदिरों को बंद किया जाएगा। इससे आमजन परेशान होगा। काम अभी शुरू नहीं हुआ है ऐसे में यह सिंहस्थ तक पूरा होगा इसमें आशंका है। शुक्रवार को ग्रीष्मावकाश पीठ ने मामले को नियमित बैंच के सामने रखने के लिए कहते हुए सुनवाई आगे बढ़ा दी।
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