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बचत की कवायद: आंगनबाड़ी शिफ्टिंग योजना अटकी, किराये पर लाखों हो रहे खर्च

बचत की कवायद: आंगनबाड़ी शिफ्टिंग योजना अटकी, किराये पर लाखों हो रहे खर्च

टीम नईदुनिया, मालवा-निमाड़। सरकारी खर्च घटाने के लिए किराये के भवनों में संचालित आंगनवाड़ियों को शासकीय स्कूलों में शिफ्ट करने की योजना मालवा-निमाड़ में जमीन पर उतरती नहीं दिख रही है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के सर्वे में सामने आया कि अधिकांश जिलों में या तो आंगनवाड़ियों के पास स्कूल उपलब्ध नहीं हैं या फिर स्कूलों में अतिरिक्त कमरे नहीं हैं। नतीजतन हजारों आंगनवाड़ियां निजी भवनों में संचालित हो रही हैं और सरकार हर माह लाखों रुपये किराये के रूप में खर्च कर रही है।

इंदौर : 827 में से केवल 16 आंगनवाड़ियों के पास मिले स्कूल

जिले में 1839 आंगनवाड़ियां संचालित हैं। इनमें 827 किराये के भवनों में चल रही हैं। सर्वे में केवल 16 केंद्रों के आसपास ही ऐसे स्कूल मिले, जहां स्थानांतरण संभव है। वर्तमान में किराये पर हर माह करीब 28 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं।

खंडवा : 297 केंद्र किराये के भवनों में

जिले की 1682 आंगनवाड़ियों में 1077 के स्वयं के भवन हैं। 308 अन्य सरकारी भवनों में संचालित हैं, जबकि 297 किराये के भवनों में चल रही हैं। इन पर हर माह लगभग 8 से 10 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं।

नीमच : 289 केंद्र अब भी किराये पर

जिले में 1112 आंगनवाड़ी केंद्र हैं। इनमें 563 स्वयं के भवनों और 260 अन्य सरकारी भवनों में संचालित हैं। शेष 289 केंद्र किराये के भवनों में चल रहे हैं। विभाग ने 35 नए भवनों की स्वीकृति भी प्राप्त की है।

शाजापुर : आधे से ज्यादा केंद्र सरकारी भवनों से बाहर

1054 आंगनवाड़ी केंद्रों में 525 के पास स्वयं के भवन हैं, जबकि 529 केंद्र स्कूलों और निजी भवनों में संचालित हो रहे हैं। जिले में किराये पर हर माह 8 लाख रुपये से अधिक खर्च हो रहा है।

खरगोन : 708 आंगनवाड़ियां किराये पर

जिले के 2295 केंद्रों में 949 के स्वयं के भवन हैं। 638 सरकारी भवनों में और 708 किराये के भवनों में संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों पर प्रतिमाह 11 लाख रुपये से अधिक किराया खर्च हो रहा है।

झाबुआ : सबसे ज्यादा 1033 केंद्र किराये पर

2706 आंगनवाड़ी केंद्रों वाले जिले में 1218 के स्वयं के भवन हैं। 455 केंद्र स्कूलों में संचालित हो रहे हैं, जबकि 1033 केंद्र अभी भी किराये के भवनों में चल रहे हैं।

बुरहानपुर : 189 केंद्रों पर हर माह 8.41 लाख खर्च

जिले में 815 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें 189 किराये के भवनों में और 55 अन्य सरकारी भवनों में संचालित हो रहे हैं। किराया मद में हर माह 8.41 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं।

देवास : 620 केंद्र निजी भवनों में

देवास जिले में 620 आंगनवाड़ी केंद्र निजी भवनों में संचालित हो रहे हैं। इनके किराये के रूप में विभाग हर माह 15.28 लाख रुपये का भुगतान कर रहा है।

  • 1033 किराये की आंगनवाड़ियां झाबुआ में
  • 827 किराये के केंद्र इंदौर में
  • 708 किराये की आंगनवाड़ियां खरगोन में
  • 620 निजी भवनों में संचालित केंद्र देवास में
  • 28 लाख रु. मासिक किराया इंदौर में
  • 15.28 लाख रु. मासिक किराया देवास में

क्यों अटकी योजना?

  • आंगनवाड़ियों के आसपास उपयुक्त स्कूल भवन नहीं
  • स्कूलों में कमरों की कमी
  • कई स्कूल पहले से पूरी क्षमता से संचालित
  • एक किलोमीटर के दायरे में पर्याप्त सरकारी भवन नहीं मिले
  • स्थानांतरण से बच्चों को स्कूल से जोड़ने की योजना फिलहाल अधर में

बड़ा सवाल

जब हजारों आंगनवाड़ियां अब भी किराये के भवनों में संचालित हो रही हैं, तब सवाल यह है कि बच्चों के लिए स्थायी भवनों का सपना कब पूरा होगा और किराया मद में हर साल खर्च होने वाली करोड़ों रुपये की राशि कब बचेगी?

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