महिला ने वर्ष 2014 में घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत कर पति द्वारा प्रताड़ित करने और अपने लिए 7 हजार रुपए प्रतिमाह, दोनों बच्चों के लिए 4-4 हजार रुपए प्रतिमाह और घरेलू हिंसा के कारण एक लाख रुपए क्षतिपूर्ति की मांग की। केस की सुनवाई में पति ने सभी आरोपों से इनकार कर दिया। दावा किया था कि पत्नी सिलाई और डेयरी कार्य से कमाई करती है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी), देवास ने वर्ष 2018 में पत्नी के साथ घरेलू हिंसा नहीं होने की बात मानते हुए उसकी ओर से दायर केस खारिज कर दिया। पत्नी और बच्चों ने अपील दायर की।
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