हरदा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत लगभग 196 संविदा स्वास्थ्यकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल मंगलवार को आठवें दिन भी जारी रही। प्रदेशभर में संविदा कर्मचारियों ने कामकाज से दूरी बनाए रखी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं और विभागीय गतिविधियों पर असर पड़ने लगा है। सीएमएचओ द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बावजूद कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। जिलाध्यक्ष सोनू चौहान कहना है कि उन्हें केवल 4.4 प्रतिशत वेतन वृद्धि की घोषणा की गई है, जबकि उनकी छह सूत्रीय मांगों में 10 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि शामिल है। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के नेतृत्व में यह आंदोलन चल रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार की ओर से कई बार आश्वासन मिलने के बावजूद उनकी लंबित मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जिसके कारण उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।उन्होंने बताया कि बुधवार को रैली निकाल कर कलेक्टर को ज्ञापन दिया जाएगा। हेल्थ सर्विसेज की गति धीमी पड़ी
वहीं संविदाकर्मी पूजा यादव ने बताया कि हड़ताल के कारण स्वास्थ्य विभाग के कई ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्य प्रभावित हो रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित योजनाओं की रिपोर्टिंग, डेटा एंट्री, मॉनिटरिंग और फील्ड गतिविधियों की गति धीमी पड़ गई है। उनका दावा है कि मिशन की अधिकांश व्यवस्थाएं संविदा कर्मचारियों पर निर्भर करती हैं, इसलिए इस आंदोलन का असर जमीनी स्तर पर महसूस किया जा रहा है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में सभी संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण, सामान्य प्रशासन विभाग की नीति के अनुसार एनपीएस और स्वास्थ्य बीमा का लाभ, अन्य राज्यों की तर्ज पर 10% वार्षिक वेतन वृद्धि, नियमित कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ता, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के वेतन में पीबीआई का समायोजन, वेतन विसंगतियों का निराकरण और नियमित कर्मचारियों के समान अवकाश सुविधा शामिल हैं। संघ ने समान कार्य के लिए समान वेतन और सुविधाएं मिलने तक ‘सार्थक’ ऐप को बंद करने की भी मांग की।
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