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यह कैसी ऑनलाइन सुविधा, इंदौर आरटीओ का सर्वर अधिकांश समय रहता है ठप, आवेदक हो रहे परेशान

यह कैसी ऑनलाइन सुविधा, इंदौर आरटीओ का सर्वर अधिकांश समय रहता है ठप, आवेदक हो रहे परेशान

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। परिवहन विभाग ने अपनी सेवाओं को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के नाम पर पूरी व्यवस्था आनलाइन तो कर दी, लेकिन इस ऑनलाइन सिस्टम की रीढ़ माने जाने वाले सर्वर को ठीक करने की जिम्मेदारी मानो भूल ही गया। नतीजा यह है कि सुविधा के दावे अब आवेदकों के लिए मुसीबत में बदलते जा रहे हैं।

नायता मुंडला स्थित आरटीओ कार्यालय में बीते चार दिन से सर्वर ठप पड़ा है, जिससे परमिट, फिटनेस, लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल जैसी जरूरी प्रक्रियाएं बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं।आवेदक परेशान हो रहे है, लेकिन सुधार नहीं हो रहा।

परिवहन विभाग ने आवेदन से लेकर निराकरण तक सभी प्रक्रियाएं वाहन पोर्टल पर आनलाइन कर दी है। दावा था कि इस प्रक्रिया के बाद आवेदकों को कार्यालय के चक्कर नहीं लगाना पढ़ेंगे, बल्कि घर बैठे ही काम हो जाएगा। सर्वर की परेशानी के कारण काम समय पर नहीं हो पा रहा है।

स्थिति यह है कि परिवहन विभाग में रोजाना हजारों आवेदन पहुंचते हैं, लेकिन सर्वर की सुस्ती और बार-बार ठप होने की समस्या के कारण काम आगे बढ़ने के बजाय फाइलें पेंडेंसी में दबती जा रही हैं। सबसे ज्यादा मार उन वाहन मालिकों और कमर्शियल चालकों पर पढ़ रही है, जिनकी रोजी-रोटी कमर्शियल वाहनों पर टीकी है।

इन वाहनों के फिटनेस और परमिट दस्तावेज समय पर नहीं बनने से वाहन सड़कों पर नहीं उतर पा रहे और कारोबार पर सीधा असर पढ़ रहा है। आरटीओ प्रदीप शर्मा का कहना है कि सर्वर बारबार ठप हो रहा है।यह समस्या पूरे प्रदेश में है और सुधार का कार्य जारी है। इंदौर में भी सर्वर की परेशानी के कारण काम प्रभावित हो रहे है।

गलती सिस्टम की, सजा जनता को

रिन्यूअल कराने वालों की परेशानी अलग है। विभागीय लापरवाही से सर्वर डाउन है, लेकिन समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर पेनल्टी आवेदकों से ही वसूली जा रही है। यानी गलती सिस्टम की, सजा जनता को। लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन जैसी प्रक्रियाओं में ओटीपी तक समय पर नहीं पहुंच रहे, जिससे आवेदक घंटों चक्कर काटने के बाद भी खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।

लंबे समय से चल रही परेशानी

हैरानी की बात यह है कि यह कोई एक-दो दिन की तकनीकी दिक्कत नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही पुरानी बीमारी है। आनलाइन सुविधा का ढोल पीटने वाला परिवहन विभाग अब इस सवाल के घेरे में है कि जब बुनियादी सिस्टम ही भरोसेमंद नहीं, तो फिर डिजिटल व्यवस्था किस काम की। इंदौर के अलावा अन्य जिलों में भी यहीं परेशानी है, लेकिन समाधान नहीं हो पा रहा है।

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