मंदसौर में बुधवार रात मुहर्रम का आयोजन अकीदत और धार्मिक श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। नई आबादी क्षेत्र से निकले जुलूस में हजारों मुस्लिम समाजजन शामिल हुए और कर्बला के शहीद हजरत इमाम हुसैन को श्रद्धांजलि अर्पित की। आयोजन के दौरान नात, कलाम और कव्वालियों की रूहानी प्रस्तुतियां दी गईं, जिससे माहौल पूरी तरह धार्मिक रंग में रंग गया। बड़ी संख्या में अकीदतमंद देर रात तक कार्यक्रम में शरीक रहे। नई आबादी स्थित इमाम बारगाह से निकला मुहर्रम का जुलूस क्षेत्र के विभिन्न मार्गों से होता हुआ बिलाल मस्जिद पहुंचा, जहां देर रात करीब ढाई बजे इसका समापन हुआ। आकर्षक विद्युत सज्जा से सुसज्जित मुहर्रम लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। जुलूस मार्ग पर समाजजनों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरे रास्ते धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा। आयोजन को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था की थी। एडिशनल एसपी टी.एस. बघेल, सीएसपी जितेंद्र भास्कर, सिटी कोतवाली, वायडी नगर और नई आबादी थाना प्रभारी सहित प्रशासनिक अधिकारी व तहसीलदार देर रात तक मौके पर मौजूद रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे। मुस्लिम समाज की ओर से भी स्वयंसेवकों की विशेष तैनाती की गई थी, जिन्होंने आयोजन को सुव्यवस्थित और सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गौरतलब है कि मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है और इसी के साथ इस्लामी नववर्ष की शुरुआत होती है। मुस्लिम समाज में इसे सब्र, कुर्बानी, त्याग और इंसाफ का महीना माना जाता है। यह महीना कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन द्वारा हक, इंसानियत और सच्चाई की रक्षा के लिए दी गई शहादत की याद दिलाता है। समाजजनों के अनुसार, मुहर्रम का संदेश अन्याय के खिलाफ डटकर खड़े होने, सत्य के मार्ग पर चलने और मानवता की रक्षा के लिए सदैव समर्पित रहने की प्रेरणा देता है। मंदसौर में वर्षों पुरानी परंपरा के तहत मुहर्रम और ताजियों के आयोजन होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल होकर हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं।
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