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Explainer: सोनम-मुस्कान से सिया तक हत्या का रास्ता क्यों चुन रहा युवा, क्या रिश्ते को खत्म करना इतना मुश्किल?

Explainer: सोनम-मुस्कान से सिया तक हत्या का रास्ता क्यों चुन रहा युवा, क्या रिश्ते को खत्म करना इतना मुश्किल?

इस तरह के मामले लगातार आने का समाज पर क्या असर हो रहा है?

डॉ. सत्यकांत कहते हैं कि इन मामलों में सबसे विचलित करने वाली बात है विश्वास का टूटना, अब आप अपने मंगेतर, जीवनसाथी किसी पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। अब लोग सोच रहे हैं कि हम किस पर विश्वास करें और किस पर नहीं करें। इसें बस प्रेम प्रसंग के रूप में नहीं देखना चाहिए। हमारे अंदर सहानुभूति की कमी होती जा रही है। हमारी नैतिकता में कमी आ रही है और खुदगर्जी की चरम सीमा का मिला-जुला रूप ऐसे मामलों में देखा जा सकता है। 

बच्चे अपने माता-पिता से अपनी परेशानी न बताकर ऐसा रास्ता क्यों चुनते हैं?

डॉ. समीक्षा कहती हैं कि कई परिवारों में आज भी जाति, धर्म, समाज की इज्जत और लोग क्या कहेंगे जैसी बातों को बहुत महत्व दिया जाता है। ऐसे माहौल में बड़े होने वाले लोग अक्सर अपने मन की बात खुलकर कहने से डरते हैं, जहां परिवार अधिक प्रगतिशील और खुले विचारों वाला होता है, वहां रिश्तों और विवाह को लेकर फैसले लेने की ज्यादा स्वतंत्रता होती है, लेकिन कई परिवारों में शादी को जीवन का अंतिम और अटूट बंधन माना जाता है। ऐसे में रिश्ते टूटने या पसंद के साथी को चुनने को लेकर दबाव बढ़ जाता है, जिससे कुछ लोग गलत फैसले लेने की ओर भी बढ़ जाते हैं।  

वहीं, डॉ. सत्यकांत कहते हैं कि भौतिक उन्नयन, पारिवारिक उन्नयन के साथ-साथ नहीं चल रहा, अभी हमारा समाज थोड़ा बहुत ही आगे बढ़ पाया है। भौतिक उन्नयन और पारिवारिक परंपराओं में गैप बहुत ज्यादा है। इसके कारण मानवीय रिश्तों में जो जटिलताएं आ रही हैं, हम आज भी रूढ़िवादी तरीके से चीजों को आगे बढ़ा रहे हैं, जबकि जमाना बदल चुका है। 

क्या इन मामलों को केवल अपराध समझें?

डॉ. सत्यकांत कहते हैं कि इन मामलों को केवल अपराध के रूप में देखने सही नहीं है यह हमारी असहजताओं को वास्तवीकता में ला रहा है, सिया के मामले में लोग असहज क्यों हो रहे हैं कि लड़की ने कैसे मार दिया? लेकिन अपराधी के मन में तो अपने स्वार्थ को पूरा करना था। केवल अपराध की दृष्टि से ना देखकर इसे बदलते हुए परिदृष्य और मानव मन की जटिलताएं और हमारे बनाए हुए मान्यताओं पर चोट के रूप में देखना चाहिए। इस खबर को लोग ऐसे देख रहे हैं कि एक 20 साल की लड़की कैसे हत्यारी निकल गई? उसे तो करोड़पति लड़का मिल रहा था फिर कैसे हत्या कर दी, लेकिन जो अपराध कर रहा था उसके मन में ऐसा कोई विचार नहीं था। 

डॉ. समीक्षा कहती हैं कि ऐसे मामलों को किसी लिंग के रूप में नहीं बल्कि ऐसे देखना चाहिए की हर व्यक्ति का स्वभाव अलग होता है, जो हत्या कर रहा है उसके मन में अपने लिंग को लेकर कोई विचार नहीं आ रहा, उसे तो बस अपनी परेशानी खत्म करनी है। 

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