शहर में फ्लाईओवरों और ब्रिजों के नीचे खाली पड़ी जमीनों का बेहतर और रचनात्मक उपयोग करने की दिशा में नगर निगम ने एक बड़ी योजना पर काम शुरू कर दिया है। इ…और पढ़ें
HighLights
- फ्लाईओवरों और ब्रिजों के नीचे खाली पड़ी जमीनों का बेहतर और रचनात्मक उपयोग करने की दिशा में नगर निगम ने एक बड़ी योजना पर काम शुरू कर दिया है
- इसके तहत शहर में दो नए स्मार्ट हब विकसित करने की तैयारी की जा रही है
- पहले चरण के प्रयोग के रूप में केसरबाग ब्रिज और भंवरकुआं ब्रिज के नीचे की खाली जगह को चुना गया है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर शहर में फ्लाईओवरों और ब्रिजों के नीचे खाली पड़ी जमीनों का बेहतर और रचनात्मक उपयोग करने की दिशा में नगर निगम ने एक बड़ी योजना पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत शहर में दो नए स्मार्ट हब विकसित करने की तैयारी की जा रही है।
पहले चरण के प्रयोग के रूप में केसरबाग ब्रिज और भंवरकुआं ब्रिज के नीचे की खाली जगह को चुना गया है। दोनों ही महत्वपूर्ण परियोजनाओं की फिजिबिलिटी रिपोर्ट पूरी तरह तैयार हो चुकी है और अब इन्हें अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति के लिए महापौर परिषद (एमआईसी) के पास भेज दिया गया है। एमआईसी की हरी झंडी मिलते ही इन दोनों ब्रिजों के नीचे स्मार्ट हब बनाने की आगे की प्रक्रिया और टेंडर कार्य तेजी से शुरू कर दिए जाएंगे।
नगर निगम द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार, दोनों ब्रिजों के नीचे बनने वाले स्मार्ट हब का वित्तीय और प्रशासनिक ढांचा इस प्रकार रहेगा:
केसरबाग ब्रिज स्मार्ट हब
- वर्तमान स्थिति: फिजिबिलिटी रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है।
- प्रशासनिक प्रक्रिया: एमआईसी (MIC) स्वीकृति के लिए प्रस्तावित।
- अनुमानित लागत: ₹5.25 करोड़ रुपये।
- अनुमानित प्रीमियम: ₹60 लाख रुपये।
- वार्षिक शुल्क: ₹30 लाख रुपये।
भंवरकुआं ब्रिज स्मार्ट हब
- वर्तमान स्थिति: फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर ली गई है।
- प्रशासनिक प्रक्रिया: एमआईसी (MIC) की मंजूरी के लिए भेजा गया है।
- अनुमानित लागत: ₹3.96 करोड़ रुपये।
- अनुमानित प्रीमियम: ₹36 लाख रुपये।
- वार्षिक शुल्क: ₹24 लाख रुपये।
इंदौर नगर निगम का यह पहला अनोखा प्रयोग
ब्रिज के नीचे व्यावसायिक या सार्वजनिक उपयोग के लिए ‘स्मार्ट हब’ विकसित करने का इंदौर नगर निगम का यह अपने आप में पहला और अनोखा प्रयोग है। हालांकि, इससे पहले भी नगर निगम ब्रिजों के नीचे की खाली जगहों का इस्तेमाल करता रहा है। उदाहरण के तौर पर, निगम द्वारा तीन इमली चौराहे पर ब्रिज के नीचे से कचरा प्रोसेसिंग प्लांट सफलतापूर्वक लगवाया जा चुका है। इसके अतिरिक्त शहर के कई अन्य ब्रिजों के नीचे व्यवस्थित हॉकर्स जोन भी चलाए जा रहे हैं, ताकि सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम किया जा सके।
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