नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदाैर। इंदौर में सड़क हादसों में लगातार बढ़ रही मौतों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा का मूल्यांकन दावों से नहीं, बल्कि हादसों और मौतों में आई कमी से होगा।
इंदौर में पांच साल से लगातार मौतों की संख्या बढ़ रही है, जो आपके सुधार के दावे से मेल नहीं खाती। न्यायमूर्ति सप्रे ने सड़कों का सर्वे कर वर्षाकाल से पहले गड्ढे भरने, ब्लैक स्पाट सुधारने, हेलमेट और सीट बेल्ट की सख्ती बढ़ाने तथा ड्रिंक एंड ड्राइव पर प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
एआईसीटीसीएल कार्यालय में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक मंगलवार को आयोजित हुई। समिति अध्यक्ष और पूर्व न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे ने बैठक में अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सड़कों पर जेब्रा क्रॉसिंग जरूर बनाएं। शहर के अंदर से लेकर बायपास पर यह होना चाहिए। इसके लिए हर माह मानिटरिंग भी करें। उन्होंने लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों में मौतों पर जवाब मांगा।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने शहर में जारी कार्याें की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अब निर्माण वाले स्थान पर पहले सर्विस रोड तैयार की जाएगी, इसके बाद निर्माण शुरू होगा। बैठक में नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल, अपर कलेक्टर नवजीवन पंवार, आईडीए सीईओ परीक्षित झाड़े, डीसीपी ट्रैफिक राजेश त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
काम गिना रहे, लेकिन सुधार नहीं दिख रहा
न्यायमूर्ति सप्रे ने अधिकारियों से कहा कि नवंबर में फिर आऊंगा, तब तक दुर्घटनाओं और मौतों में कमी दिखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में हर वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में ढाई से तीन लाख लोगों की मौत होती है। हादसों में होने वाली मौतों को रोकना सरकार और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
287 मौतों का नहीं बता सके कारण
बैठक में अधिकारियों ने पिछले वर्ष 287 मौतों की जानकारी दी। इस पर न्यायामूर्ति सप्रे ने पूछा कि आखिर इन मौतों के पीछे मुख्य कारण क्या थे।अधिकारी मौतों का कारण विश्लेषणवार नहीं दे सके। उन्होंने बुधवार शाम तक पिछले पांच वर्षों की दुर्घटनाओं का कारणवार विश्लेषण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा पांच साल का विश्लेषण तैयार करे और जिस वजह से हादसे अधिक हो रहे, उस पर अंकुश लगाए।
हेलमेट और सीट बेल्ट पर करें सख्ती
उन्होंने कहा कि शहर में करीब 50 प्रतिशत दोपहिया चालक हेलमेट नहीं पहन रहे हैं और पीछे बैठने वाले भी नियमों का पालन नहीं कर रहे। सीट बेल्ट नहीं लगाने से भी बड़ी संख्या में लोगों की जान जा रही है।उन्हाेंने जनजागरूकता अभियान के साथ सख्त चालानी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।साथ ही कहा कि नशे में वाहन चलाना हादसों का बड़ा कारण है। ऐसे मामलों में लगातार अभियान चलाकर सख्ती बरती जाए।
ब्लैक स्पॉट के चयन में रखें सावधानी
न्यायमूर्ति सप्रे ने कहा बरसात के दौरान भी गड्ढों की मरम्मत जारी रहे। बुधवार से ही शहर की सड़कों का सर्वे कर गड्ढे भरने का काम शुरू करें। उन्होंने ब्लैक स्पाट निर्धारण में लापरवाही पर नराजगी जताते हुए कहा कि किसी स्थान पर कई लोगों की मौत के बाद उसे ब्लैक स्पाट घोषित करना गलत है। दुर्घटनाओं के शुरुआती संकेत मिलते ही इंजीनियरिंग सुधार, संकेतक और मार्किंग की व्यवस्था की जानी चाहिए।
यह दिए गए निर्देश
- नवंबर तक सड़क दुर्घटनाओं और मौतों में कमी लाने के दिए निर्देश।
- हेलमेट, सीट बेल्ट और ड्रिंक एंड ड्राइव पर सख्त अभियान चलाने के निर्देश।
- बरसात में गड्ढे तत्काल भरने और ब्लैक स्पाट सुधारने के आदेश।
- सड़क निर्माण में इंजीनियरिंग खामियां दूर कर मार्किंग और संकेतक लगाने पर निर्देश
- दुर्घटनाओं का कारणवार विश्लेषण कर उसी आधार पर सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश।
इंदौर में पांच साल से लगातार मौतों की संख्या बढ़ रही है
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