डिजिटल डेस्क, इंदौर। मध्य प्रदेश का इंदौर शहर आए दिन चर्चाओं में रहता है। ताजा मामला ऐसे ही गड़गड़झाले का है। असल में यहां एक ऐसा अस्पताल चल रहा है जिसका कोई वजूद ही नहीं है। केवल कागजों पर चल रहे इस अस्पताल में बकायदा डॉक्टर, नर्स, लैब टेक्नीशियन और फार्मासिस्ट काम करते हैं। यहां तबादले भी होते हैं, बस दिखाई देते तो मरीज और अस्पताल का भवन।
इंदौर में यह गड़बड़ी खजराना सिविल अस्पताल के नाम पर हो रही है, जिसे 6 साल पहले स्वीकृति मिली थी। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार यहां भवन ना होने के बावजूद 87 सरकारी पद स्वीकृत हुए, नियुक्तियां हुईं और अब उनके नाम पर तबादले भी होते रहते हैं। सबसे नया पोस्टिंग ऑर्डर 15 जून, 2026 को जारी किया गया था। एक लैब टेक्नीशियन को ऑफिशियली उस हॉस्पिटल में ट्रांसफर कर दिया गया, जिसने कभी एक भी मरीज को भर्ती नहीं किया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2020 में जब मध्य प्रदेश सरकार ने खजराना के लिए 100 बेड का सिविल हॉस्पिटल मंज़ूर किया तो खजराना, मूसाखेड़ी, तेजाजी नगर, बिचौली हप्सी और आस-पास के इलाकों में तीन लाख से ज़्यादा लोगों को सेवा मिलने की उम्मीद थी।
सरकार ने स्पेशलिस्ट डॉक्टर, मेडिकल ऑफिसर, स्टाफ़ नर्स, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन और सपोर्ट स्टाफ़ समेत 87 पोस्ट मंज़ूर कीं। लेकिन छह साल बाद भी निर्माण शुरू नहीं हुआ है क्योंकि ज़मीन अलॉट नहीं हुई है।हॉस्पिटल की बिल्डिंग पूरी तरह न होने के बावजूद मंजूर की गई जगह सरकारी पोर्टल पर मौजूद है।
अधिकारी कहते हैं स्टाफ को अटैच किया गया
अधिकारियों का कहना है कि मंज़ूर किए गए स्टाफ़ को PC सेठी हॉस्पिटल, हुकुमचंद हॉस्पिटल, संजीवनी क्लीनिक और इंदौर की दूसरी सरकारी हेल्थ सुविधाओं से अटैच कर दिया गया है। कागज़ों पर, उनमें से कई खजराना सिविल हॉस्पिटल से जुड़े हुए हैं। असल में, हॉस्पिटल का कोई पता नहीं है, कोई वार्ड नहीं है, कोई बेड नहीं है और कोई मरीज़ नहीं है।
स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताई वजह
- उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि ओरिजिनल प्रपोज़ल समय के साथ बदल गया था। उनके मुताबिक, जो पहले एक अर्बन प्राइमरी हेल्थ सेंटर था, उसे बाद में 50-बेड वाले सिविल हॉस्पिटल में अपग्रेड किया गया था, लेकिन सही ज़मीन न मिलने की वजह से कंस्ट्रक्शन शुरू नहीं हो सका।
- शुक्ला ने कहा, “मंज़ूर पोस्ट डिपार्टमेंट के पोर्टल पर दिख रही हैं। CMHO पैरामेडिकल स्टाफ़ को पास के संजीवनी क्लीनिक से अटैच कर सकते हैं। हम 50-बेड वाले हॉस्पिटल के लिए ज़मीन की तलाश में लगे हुए हैं,” और बताया कि कर्मचारियों को इंदौर में दूसरी खाली पोस्ट पर एडजस्ट कर दिया गया है।
- कैट के चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर डॉ. माधव हसानी ने भी कन्फर्म किया कि हॉस्पिटल के साथ पोस्ट भी मंज़ूर की गई थीं। उन्होंने कहा कि डिपार्टमेंट समय पर सही सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा नहीं कर सका, और शहरी इलाकों में ज़मीन का अधिग्रहण मुश्किल और समय लेने वाला काम है।
इधर, कांग्रेस का कहना है यह घोटाला है
कांग्रेस ने इसे प्रशासनिक नाकामी का मामला बताया है। कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने हाई-लेवल जांच की मांग की। आरोप लगाया कि यह एक बड़ा घोटाला है। उन्होंने कहा, “जहां हॉस्पिटल ज़मीन पर है ही नहीं, फिर भी स्टाफ को वहां पोस्ट किया जा रहा है। विधानसभा में कांग्रेस इस मुद्दे को ज़ोरदार तरीके से उठाएगी।
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