पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के रावलाकोट में सेना और सरकार के खिलाफ एक सभा में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए। यहां अधिवक्ता मेहराह ख्वाजा ने पाकिस्तान की सेना पर निर्दोष नागरिकों की हत्या का आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने विदेशों में रह रहे कश्मीरियों से पांच जुलाई को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने की अपील की।
सभा को संबोधित करते हुए ख्वाजा ने कहा कि किसी भी कानून के तहत सेना को किसी की हत्या करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान के नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा कि अगर वह सार्थक संवाद करने में सक्षम नहीं है तो उसे पद छोड़ देना चाहिए। उन्होंने ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरी समुदाय से पांच जुलाई को बड़े स्तर पर प्रदर्शन आयोजित कर पाकिस्तान की कार्रवाई की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करने की अपील की।
ब्रिटेन में रह रहे कश्मीरियों से की अपील
मेहराम ख्वाजा ने कहा, “मैं अपील करता हूं कि पांच जुलाई को विदेशों में रहने वाले सभी कश्मीरी अपनी आवाज बुलंद करें। बर्मिंघम से लेकर लंदन तक सभी कश्मीरी पाकिस्तान के खिलाफ आवाज उठाएं।” उन्होंने पाकिस्तान पर क्षेत्र के संसाधनों के दोहन का आरोप लगाया और कहा कि लोगों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय अब अपने ही नागरिकों की हत्या की जा रही है।
उन्होंने विभिन्न शहरों के लोगों से सड़कों पर उतरने, बाजार और चौक पूरी तरह बंद रखने की भी अपील की। सभा में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। अपने संबोधन में ख्वाजा ने पाकिस्तान की सेना पर निर्दोष नागरिकों की हत्या का आरोप दोहराया। उन्होंने आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों और क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने का भी जिक्र किया।
प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना की बर्बरता जारी
इस बीच, सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई का दावा किया गया है। वीडियो में जम्मू-कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के प्रमुख सदस्यों में शामिल सरदार अमन खान ने पीओके, कश्मीर घाटी, लद्दाख, पुंछ और राजौरी के लोगों से पांच जुलाई के प्रस्तावित प्रदर्शन का समर्थन करने की अपील की है। संगठन के अनुसार, यह प्रदर्शन पीओके के विभिन्न हिस्सों में आयोजित किए जाएंगे।
वीडियो में सरदार अमन खान ने कहा कि पीओके में पिछले लगभग एक महीने से लोगों को अपने बुनियादी अधिकारों की मांग करने पर दमन, हिंसा और सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र में खाद्य सामग्री और दवाओं की आपूर्ति बाधित कर दी गई है और लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से 5 जुलाई के प्रदर्शन में समर्थन देने की अपील की।
इससे पहले 30 जून को जम्मू-कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने आरोप लगाया था कि विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करने से रोक दिया गया। संगठन ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक असहमति को दबाने की कार्रवाई बताया था।
जेएएसी ने यह भी दावा किया था कि क्षेत्र में खाद्य आपूर्ति बाधित की गई है और लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। संगठन का कहना है कि उसका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और वह अपने बुनियादी अधिकारों की मांग जारी रखेगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही पाकिस्तान की आलोचना
हाल के घटनाक्रमों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान की आलोचना हुई है। मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने क्षेत्रीय चुनावों से पहले पाकिस्तान की कार्रवाई की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण राजनीतिक असहमति को दबाने के लिए बल प्रयोग किया गया और जेएएसी को गैरकानूनी तरीके से प्रतिबंधित संगठन घोषित किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, पीओजेके के कुछ कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में आर्थिक नाकेबंदी जैसी स्थिति है, खाद्य सामग्री की आपूर्ति प्रभावित है, लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई है और धरना-प्रदर्शन पर नजर रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने 27 जुलाई को प्रस्तावित स्थानीय चुनावों के बहिष्कार का भी आह्वान किया है।
Source link
#PoK #Protests #पओक #म #बढ #PAK #सरकर #क #वरध #वदश #म #बस #कशमरय #स #पच #जलई #क #परदरशन #क #अपल



Post Comment