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ग्वालियर में डॉग बाइट के साथ ‘कैट बाइट’ का भी बढ़ा खौफ, JAH में हर दिन आ रहे 7 से 8 मामले; पालतू बिल्लियां भी बना रही शिकार

ग्वालियर में डॉग बाइट के साथ ‘कैट बाइट’ का भी बढ़ा खौफ, JAH में हर दिन आ रहे 7 से 8 मामले; पालतू बिल्लियां भी बना रही शिकार

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर में अब केवल कुत्तों के काटने ही नहीं, बल्कि बिल्लियों के काटने (कैट बाइट) के मामलों में भी तेजी देखी जा रही है। जयारोग्य अस्पताल (जेएएच) की एंटी-रेबीज ओपीडी में प्रतिदिन औसतन सात से आठ मरीज बिल्ली के काटने या खरोंच लगने के बाद वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। पिछले एक महीने में कैट बाइट के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है, जिनमें अधिकतर मामले पालतू बिल्लियों से जुड़े हुए हैं।

जेएएच की एंटी-रेबीज ओपीडी के अनुसार, पिछले चार दिनों में डॉग बाइट के 155 और कैट बाइट के 30 से 35 मामले सामने आए हैं। चिकित्सकों के अनुसार, अधिकतर कैट बाइट के मामले पालतू बिल्लियों से जुड़े हैं। लोग अक्सर मानते हैं कि घर में पाली गई बिल्ली सुरक्षित होती है, लेकिन टीकाकरण और संक्रमण की स्थिति का ध्यान न रखने पर खतरा बना रहता है।

बिल्ली के काटने या खरोंच को हल्के में न लें

चिकित्सकों का कहना है कि बिल्ली के काटने या खरोंच को लोग आमतौर पर गंभीरता से नहीं लेते, जबकि यह भी रेबीज संक्रमण का कारण बन सकता है।

यह भी जानें

पालतू और आवारा दोनों तरह की बिल्लियों से खतरा हो सकता है।

गहरे नाखून लगने या काटने से संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है।

समय पर उपचार न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।

क्या करें ऐसे मामलों में

घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह साफ करें।

किसी भी तरह की देरी न करें।

तुरंत नजदीकी अस्पताल जाकर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाएं।

पालतू पशुओं का नियमित टीकाकरण कराएं।

फैक्ट फाइल

रोजाना कैट बाइट मरीज: 7–8 (औसतन)

पिछले चार दिनों में कैट बाइट: 30–35 मामले

पिछले चार दिनों में डॉग बाइट: 155 मामले

अधिकतर कैट बाइट के मामले: पालतू बिल्लियों से जुड़े

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