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बालाघाट में सामुदायिक भवन का स्ट्रक्चर बाढ़ में डूबा:  निर्माण स्थल के चयन पर सवाल, अधिकारी बोले- गांव में दूसरी जगह नहीं थी – Balaghat (Madhya Pradesh) News

बालाघाट में सामुदायिक भवन का स्ट्रक्चर बाढ़ में डूबा: निर्माण स्थल के चयन पर सवाल, अधिकारी बोले- गांव में दूसरी जगह नहीं थी – Balaghat (Madhya Pradesh) News


बालाघाट में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और जिले में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। इसी बीच, ग्राम पंचायत नैतरा में ₹47 लाख की भारी-भरकम लागत से बन रहे सामुदायिक भवन का स्ट्रक्चर बाढ़ के पानी में पूरी तरह डूब गया है। इस घटना के बाद से ही भवन के निर्माण स्थल के चुनाव पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। दरअसल, यह पूरा इलाका हर साल भारी बारिश के दौरान पास के नाले में आने वाली बाढ़ की चपेट में रहता है। इसके बावजूद प्रशासन ने इसी नाले से सटकर भवन का निर्माण शुरू करवा दिया, जो इस साल की पहली बड़ी बारिश में ही पानी में समा गया। ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच रामकिशोर रनगिरे ने विभाग की दूरदर्शिता और प्लानिंग पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही आरईएस (RES) के अधिकारी ई. इक्का को साफ तौर पर चेताया था कि यह इलाका पूरी तरह ‘डूब क्षेत्र’ में आता है। पूर्व सरपंच ने सामुदायिक भवन के लिए गांव में पानी की टंकी, साईं मंदिर या ग्राम पंचायत के पास खाली पड़ी दूसरी सुरक्षित जमीनों के विकल्प भी सुझाए थे। रनगिरे का आरोप है कि उनके इन सभी सुरक्षित सुझावों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया और जानबूझकर नाले के पास ही भवन का काम शुरू कराया गया। उनका कहना है कि यदि यह भवन इसी जगह पर बनकर तैयार भी हो जाता है, तो भविष्य में हर साल बारिश के पानी से इसके ढहने या क्षतिग्रस्त होने का खतरा हमेशा बना रहेगा। अधिकारी की दलील- प्लिंथ ऊंचा करेंगे और बनाएंगे रिटर्निंग वॉल दूसरी तरफ, आरईएस अधिकारी इक्का ने अपनी सफाई में अजीब तर्क दिया है। उनका कहना है कि गांव में कोई दूसरी सही जगह उपलब्ध नहीं थी, इसलिए जो जगह मिली वहीं काम शुरू करवा दिया गया। उन्होंने कहा कि अगर नाले की बाढ़ से स्ट्रक्चर डूबा है, तो अब भवन का प्लिंथ (नींव का स्तर) और ऊंचा किया जाएगा। साथ ही, भवन को बाढ़ से बचाने के लिए पंचायत के बजट से एक ‘रिटर्निंग वॉल’ (सुरक्षा दीवार) खड़ी की जाएगी। हालांकि, अधिकारी के इस फैसले से ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। गांव वालों का कहना है कि अगर नाले के पास सुरक्षा दीवार खड़ी की गई, तो बाढ़ का पानी वहां से डाइवर्ट होकर सीधे गांव के रिहायशी इलाकों और घरों में घुस जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों का भारी नुकसान हो सकता है। इस पूरे विवाद पर जब ग्राम पंचायत सरपंच से उनके मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। जिले में अब तक करीब 12 इंच बारिश जिले में अब तक लगभग 11.6 इंच बारिश हो चुकी है। सबसे ज्यादा बारिश: वारासिवनी तहसील में सबसे अधिक लगभग 16.6 इंच पानी बरसा है। सबसे कम बारिश: बिरसा तहसील में सबसे कम लगभग 6.7 इंच वर्षा रिकॉर्ड हुई है। बीते 24 घंटे का हाल पिछले 24 घंटों में जिले में 16 मिलीमीटर (यानी लगभग 0.6 इंच) बारिश हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक 300 मिलीमीटर (यानी लगभग 11.8 इंच) बारिश दर्ज की गई थी।

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