ऑपरेशन के दौरान पित्त नली में गंभीर चोट लग गई, जिसके बाद उसे बार-बार तेज बुखार, पीलिया और पेट दर्द की शिकायत रहने लगी। पिछले एक साल में वह छह बार अस्प…और पढ़ें
HighLights
- गर्भावस्था के चौथे माह में गंभीर पित्त नली की समस्या से जूझ रही 22 वर्षीय महिला की हुई सर्जरी
- चिकित्सा साहित्य के अनुसार यह देश के शुरुआती मामलों में से एक मानी जा सकती है
- महिला का करीब डेढ़ साल पहले एक निजी अस्पताल में पित्ताशय का ऑपरेशन हुआ था
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने जटिल सर्जरी कर 22 वर्षीय गर्भवती महिला की जान बचाई और गर्भ में पल रहे शिशु को भी सुरक्षित रखा। मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा था, जिसके चलते सफल ऑपरेशन कर दोनों को सुरक्षित रखा गया।
विशेषज्ञों का दावा है कि गर्भावस्था के दौरान इस तरह की जटिल पित्त नली पुनर्निर्माण (बाइल डक्ट रिकंस्ट्रक्शन) सर्जरी बेहद दुर्लभ होती है और उपलब्ध चिकित्सा साहित्य के अनुसार यह देश के शुरुआती मामलों में से एक मानी जा सकती है। महिला का करीब डेढ़ साल पहले एक निजी अस्पताल में पित्ताशय का ऑपरेशन हुआ था। इस दौरान महिला की पित्त नली में गंभीर चोट लग गई थी।
ऑपरेशन के दौरान पित्त नली में गंभीर चोट लग गई
ऑपरेशन के दौरान पित्त नली में गंभीर चोट लग गई, जिसके बाद उसे बार-बार तेज बुखार, पीलिया और पेट दर्द की शिकायत रहने लगी। पिछले एक साल में वह छह बार अस्पताल में भर्ती हुई और हर बार 10 से 15 दिन तक इलाज कराना पड़ा। लगातार संक्रमण के कारण उसकी हालत बिगड़ती गई। इसी बीच महिला गर्भवती हो गई।
मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की जान को खतरा था
गर्भावस्था के चौथे महीने में उसकी तबीयत फिर बिगड़ी और उसे एमटीएच अस्पताल से सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल रेफर किया गया। जांच में पता चला कि यकृत की दोनों मुख्य पित्त नलियों के संगम पर गंभीर रुकावट है, जिससे मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की जान को खतरा था। ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और इसके बाद महिला का पीलिया, बुखार व पेट दर्द समाप्त हो गया। यह जटिल ऑपरेशन डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह गेहलोत, डा. अरुण झाड़े और डॉ. अरुण पटेल की टीम ने अधीक्षक डा. डीके शर्मा के मार्गदर्शन में किया।
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