लिटचौक के विशेष प्रकल्प लिट वुमेंस चौक के तहत ‘इकोनॉमिक इंडिपेंडेंस और मेंटल वेलनेस फॉर वूमेन’ विषय पर राउंड टेबल कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कॉन्फ्रेंस में शहर के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही प्रबुद्ध महिलाओं ने हिस्सा लिया और अपनी विचार प्रकट किए।
कॉन्फ्रेंस में पत्रकारिता, चिकित्सा, शिक्षा, ब्यूटी, रक्षा, वकालत, उद्यम, स्वास्थ, सामाजिक कार्य, पर्यावरण, साहित्य के क्षेत्रों में सक्रियता से कार्यरत 20 महिलाओं ने उत्साह से भाग लिया। सभी ने आर्थिक स्वतंत्रता, पारिवारिक पृष्ठभूमि में स्त्रियों की भूमिका, स्त्री सशक्तिकरण, भारतीय महिलाओं के जीवन की चुनौतियां, आर्थिक साक्षरता और मनी मैनेजमेंट जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। 3 घंटे तक हुई इस चर्चा में कई अहम पहलू सामने आए।
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महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता के विषय में सीए किमीशा सोनी ने कहा कि “महिलाओं को अपने पैसे कमाने के साथ साथ उन्हें किस जगह इन्वेस्ट करना है और भविष्य उसका सही से इस्तेमाल कैसे करना है यह जानना भी आवश्यक है। फाइनेंशियल मैनेजमेंट हर महिला के लिए बहुत आवश्यक है।” डॉ स्वाति भार्गव ने कहा कि “स्वस्थ समाज के लिए महिलाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ का सेहतमंद होने अतिआवश्यक है। अक्सर हम अपनी व्यस्तता के चलते अपने स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रखते है लेकिन इसे नजरअंदाज करना भविष्य में कई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।”
बचपन से ही लड़कियों को मजबूत बनाना समाज की जिम्मेदारी
पंजाब ज्वेल्स की फाउंडर अनुभा आनन्द ने महिलाओं के हक और आत्मनिर्भरता पर बात करते हुए कहा कि “घर हो या ऑफिस हर जगह महिलाओं के विचार सुनना और उन्हें डिसीजन मेकिंग में शामिल करना बहुत जरूरी है। हमें बचपन से ही बच्चियों में यह आदत विकसित करनी होगी की वह भी घर और काम के महत्वपूर्ण फैसलों में भागीदारी और और स्वतंत्रता से अपने विचार प्रकट करे।” लेफ्टिनेंट कर्नल प्रीथा गांगुली ने कहा कि “बचपन से ही लड़कियों को मजबूत बनाना समाज की जिम्मेदारी है। उन्हें सिर्फ एक दायरे में बांधना और उन्हें कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित कर देना समाज के विकास में बहुत बड़ी बाधा है।
आप जा चाहती हो वो खुद कर सकती हो
अरबिंदो ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन चानी त्रिवेदी ने महिलाओं के आत्मनिर्भरता विषय पर बात करते हुए कहा कि हर लड़की के लिए आत्मनिर्भरता सबसे जरूरी है। हमें इस भ्रम को अपनी बच्चियों के मन से निकालना होगा कि उनके लिए कोई राजकुमार आएगा और उनकी हर इच्छा पूरी करेगा। उन्हें यह सीखना जरूरी है कि आप जा चाहती है वो खुद कर सकती हो।” एडवोकेट दृष्टि रावल ने आर्थिक विकास और महिलाओं के अधिकार पर बात करते हुए कहा कि “आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत महिलाओं का आर्थिक विकास और उसके साथ फाइनेंशियल मैनेजमेन्ट की समझ है। आप चाहे हाउसवाइफ हो या वर्किंग वूमेन फाइनेंस की समझ आज सबसे जरूरी है।”
इन्होंने साझा किए अपने विचार
चर्चा में अरबिंदो ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन चानी त्रिवेदी, पत्रकार डॉ आरती मंडलोई, गायनेकोलॉजिस्ट डॉ स्वाति भार्गव, सीए किमिशा सोनी, पंजाब ज्वेल्स की फाउंडर अनुभा आनन्द, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रीथा गांगुली, एडिशनल डीसीपी सीमा अलावा, शिक्षाविद् दीप्ति मसंद शर्मा, इंटरप्रेन्योर दीपिका उपाध्याय, एडवोकेट दृष्टि रावल, डॉ मीनल उप्रेती, हेल्थकेयर एंड वेलनेस एक्सपर्ट विजयता जैन, फाउंडर ऑफ अस्माकम लाइफ यूनिवर्सिटी अर्चना परसाई गहलोत, फाउंडर ऑफ शी इंपायर इंडिया शीतल बदौले, फाउंडर ऑफ ओरेविया वेल्थ रचना घोलप, डॉ दीप्ति जैन, ऑथर गरिमा दुबे, ब्यूटी एजुकेटर उन्नति सिंह, डॉ पल्लवी गुप्ता वाजे सम्मिलित हुईं। संचालन विनीता घाडगे द्वारा किया गया।
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