धार भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई होगी। इस मामले में तीन अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं। तीनों में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के पदाधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है। ये सभी हाईकोर्ट में दायर मूल याचिका में याचिकाकर्ता की भूमिका में थे।
फैसले को तीन पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है
भोजशाला को हिंदू मंदिर घोषित करते हुए हाईकोर्ट ने वर्ष के 365 दिन वहां पूजा करने का अधिकार हिंदू पक्ष को दिया है। हाईकोर्ट के इस फैसले को तीन पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। अब सुप्रीम कोर्ट भोजशाला से जुड़ी तीनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करेगा।
भोजशाला को इंदौर हाईकोर्ट ने हिंदू मंदिर माना है। इस फैसले को मुस्लिम पक्ष ने चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की। यह याचिका हाईकोर्ट के फैसले के बाद आने वाले पहले शुक्रवार से एक दिन पहले दायर की गई थी। पहले शहर काजी, फिर कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी और उसके बाद वक्फ बोर्ड की ओर से जिब्रान अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
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‘हम सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखेंगे’
उधर, हिंदू पक्ष भी सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं को लेकर तैयारी कर रहा है। पहले ही भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर की जा चुकी है, ताकि पक्ष को सुने बिना कोई स्थगन आदेश (स्टे) जारी न हो सके। कोर्ट में हिंदू पक्ष के वकील भी अपना पक्ष रखेंगे। इस मामले में विष्णु शंकर जैन हिंदू पक्ष की ओर से पैरवी करेंगे। आशीष गोयल का कहना है कि हम सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखेंगे। भोजशाला पूर्व से ही मां सरस्वती का मंदिर रहा है।
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