डिजिटल डेस्क, नईदुनिया। राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी (Sonam Raghuvanshi) को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ इस मामले में यह जांच करेगी कि गिरफ्तारी के समय कानून के अनुसार सोनम को ‘ग्राउंड्स ऑफ अरेस्ट’ यानी गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध कराए गए थे या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगी गिरफ्तारी के आधारों की प्रति
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार को निर्देश दिया है कि वह गिरफ्तारी के समय सोनम रघुवंशी को दिए गए ‘ग्राउंड्स ऑफ अरेस्ट’ की प्रति अदालत के समक्ष पेश करे। यह दस्तावेज इस मामले में अहम माना जा रहा है क्योंकि ट्रायल कोर्ट ने इसी आधार पर सोनम को जमानत दी थी कि गिरफ्तारी के समय उसे कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध नहीं कराए गए थे। बाद में मेघालय हाईकोर्ट ने भी इस आदेश को बरकरार रखा।
मेघालय सरकार ने बताया टाइपिंग की गलती
मेघालय सरकार का कहना है कि सोनम को गिरफ्तारी के आधार विधिवत बताए गए थे। सरकार के अनुसार विवाद केवल दस्तावेज में हुई टाइपिंग की त्रुटि का है। गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेज में हत्या से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के स्थान पर गलती से धारा 403(1) अंकित हो गई थी, जबकि भारतीय न्याय संहिता में ऐसी कोई धारा मौजूद नहीं है। राज्य सरकार का दावा है कि यह मात्र लिपिकीय त्रुटि है और इससे गिरफ्तारी की वैधता प्रभावित नहीं होती।
पहले अंतरिम रोक लगाने से किया था इनकार
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार की याचिका पर सोनम रघुवंशी की जमानत पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हालांकि जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि पहली नजर में हाईकोर्ट द्वारा मामले का निस्तारण किए जाने के तरीके पर उन्हें आपत्ति है।

पीठ ने यह भी कहा था कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत नहीं होता कि यह ऐसा मामला है, जिसमें आरोपी को गिरफ्तारी के आधार बिल्कुल नहीं बताए गए हों। इसके बावजूद अदालत ने अंतरिम राहत इसलिए नहीं दी क्योंकि सोनम पहले ही जमानत पर रिहा हो चुकी थी, कुछ समय जेल में रह चुकी थी और उसने राज्य सरकार की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था।
सॉलिसिटर जनरल ने रखा सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि दस्तावेज में गलत धारा दर्ज होना केवल टाइपिंग की गलती थी। उन्होंने कहा कि मजिस्ट्रेट ने आरोपी को गिरफ्तारी के आधार समझाए थे और ट्रांजिट रिमांड के दौरान भी इसका रिकॉर्ड मौजूद है।
उन्होंने यह भी कहा कि पहले इसी मामले में सोनम की जमानत मेरिट के आधार पर खारिज हो चुकी थी। बाद में इसी तकनीकी त्रुटि को आधार बनाकर राहत दी गई, जबकि सुप्रीम कोर्ट पहले स्पष्ट कर चुका है कि ऐसी लिपिकीय गलती, जिससे आरोपी को वास्तविक नुकसान न हुआ हो, जमानत का आधार नहीं बन सकती।
कोर्ट ने उठाए थे कई सवाल
सुनवाई के दौरान जस्टिस सुंदरेश ने सोनम की ओर से पेश वकील से पूछा था कि यदि गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए थे तो शुरुआती जमानत याचिकाओं में यह मुद्दा क्यों नहीं उठाया गया। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या केवल गलत धारा लिखे जाने के कारण हाईकोर्ट द्वारा जमानत देना उचित था।
सोनम के वकील ने दावा किया कि उन्हें गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए थे। इस पर अदालत ने कहा था कि यदि ऐसा था तो यह आपत्ति पहले क्यों नहीं दर्ज कराई गई। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यदि सोनम रिहा नहीं हुई होती तो जमानत पर रोक लगाने पर विचार किया जा सकता था।
ऐसे सामने आई थी हत्या की साजिश
11 मई 2025 को इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी सोनम रघुवंशी से हुई थी। शादी के बाद दोनों हनीमून मनाने मेघालय गए। 23 मई 2025 को दोनों अचानक लापता हो गए। 3 जून 2025 को पुलिस ने मेघालय की एक गहरी खाई से राजा रघुवंशी का शव बरामद किया।
जांच में खुलासा हुआ कि हनीमून की आड़ में हत्या की साजिश रची गई थी। मामले की जांच के दौरान कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और जांच एजेंसियों ने सोनम रघुवंशी को भी मुख्य साजिशकर्ता मानते हुए गिरफ्तार कर जेल भेजा। फिलहाल वह जमानत पर रिहा है और उसकी जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है।
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