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फर्जी नामांतरण मामला: इंदौर में गलत तरीके से नामांतरण करवाने के बाद 51 लोगों ने संपत्ति बेच भी दी

फर्जी नामांतरण मामला: इंदौर में गलत तरीके से नामांतरण करवाने के बाद 51 लोगों ने संपत्ति बेच भी दी

यह बात पंजीयन विभाग द्वारा नगर निगम को दी गई जानकारी में सामने आई है। नगर निगम ने पंजीयन विभाग को पत्र लिखकर इन संपत्तियों के आगे ट्रांसफर पर रोक लगान…और पढ़ें

Publish Date: Wed, 15 Jul 2026 08:56:34 AM (IST)Updated Date: Wed, 15 Jul 2026 08:56:34 AM (IST)

फर्जी नामांतरण मामले में चल रही जांच। (एआई इमेज)

HighLights

  1. यह बात पंजीयन विभाग द्वारा नगर निगम को दी गई जानकारी में सामने आई है
  2. नगर निगम ने पंजीयन विभाग को पत्र लिखकर इन संपत्तियों के आगे ट्रांसफर पर रोक लगाने के लिए कहा है
  3. निगम ने अब इस मामले में एफआइआर दर्ज कराने की तैयारी कर ली है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। नगर निगम में हुए फर्जी नामांतरण मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है नई-नई जानकारी सामने आ रही है। फर्जी तरीके से रातों रात नामांतरण कराने वाले 51 लोगों ने संपत्ति दूसरों को बेच भी दी है।

यह बात पंजीयन विभाग द्वारा नगर निगम को दी गई जानकारी में सामने आई है। नगर निगम ने पंजीयन विभाग को पत्र लिखकर इन संपत्तियों के आगे ट्रांसफर पर रोक लगाने के लिए कहा है। निगम ने अब इस मामले में एफआइआर दर्ज कराने की तैयारी कर ली है। जांच सप्ताहभर में पूरी हो जाएगी। बताया जा रहा है कि जांच में कुछ अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं। हालांकि कोई इसकी पुष्टि नहीं कर रहा।

अपर आयुक्त आकाश सिंह ने बताया कि हमने सभी 354 लोगों को नोटिस जारी किया था। इनमें से करीब 90 लोगों ने जवाब दे दिया है। डाक के माध्यम से भेजे गए जवाब में इनमें से करीब 60 लोगों का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि संपत्ति का नामांतरण कैसे हो गया, क्योंकि उन्होंने इसके लिए कोई प्रयास ही नहीं किए थे।

चूंकि ये जवाब डाक से आए हैं, इसलिए इनमें नामातरण करवाने वालों से सवाल-जवाब नहीं हो सके हैं। जवाब के बाद हमने पंजीयन विभाग को पत्र लिखकर रजिस्ट्री की जानकारी मांगी थी। मंगलवार रात पंजीयन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार फर्जी नामातरण करवाने के बाद 51 लोगों ने संपत्ति की रजिस्ट्री भी कर दी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि एक तरफ तो लोग कह रहे हैं कि उन्हें नहीं पता कि संपत्ति उनके नाम कैसे हो गई और दूसरी तरफ वे संपत्ति की दूसरे के पक्ष में रजिस्ट्री कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि इस पूरे फर्जीवाड़े को संगमत होकर अंजाम दिया गया है।

यह है फर्जी नामांतकरण कांड

पिछले दिनों नगर निगम में नामांतरण फर्जीवाड़ा सामने आया था। यह बात सामने आई थी कि अलग-अलग जोन में लंबित नामांतरण के ऐसे मामले जिनमें विवाद चल रहा था एक ही दिन में दो उपायुक्त केएस सगर और प्रदीप जैन के आइडी से से निराकृत हो गए। मामले में शिकायत के बाद जांच हुई तो पता चला कि ऐसे 354 मामले हैं, जिनमें फर्जी नामांतरण किया गया है।

फर्जीवाड़ा जनवरी से मार्च 2026 के बीच हुआ था। इन संपत्तियों के नामांतरण की फाइलें लंबे समय से अटकी हुई थी, लेकिन उक्त अवधि में रात दस से सुबह तीन बजे के बीच नामांतरण किए गए थे। फर्जीवाड़ा करते हुए इन संपत्तियों के संपत्तिकर खातों में संपत्ति स्वामियों के नाम बदल दिए गए। जिन संपत्तियों के फर्जी नामांतरण किए गए उनमें से ज्यादातर में पारिवारिक विवाद था। यह बात भी सामने आई है कि ज्यादातर फर्जी नामांतरण उपायुक्त केशव सगर की आइडी से किए गए थे, जबकि कुछ उपायुक्त प्रदीप जैन की आइडी से बदले गए थे।

एक सप्ताह में पूरी कर लेंगे जांच

जांच जारी है। उम्मीद है कि एक सप्ताह में हम इसे पूरा कर लेंगे। जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। फिलहाल 51 लोगों द्वारा फर्जी नामांतरण के बाद रजिस्ट्री किए जाने की बात सामने आई है। यह संख्या और बढ़ सकती है। अब हम नामांतरण करने वाले और करवाने वालों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेंगे। -आकाश सिंह, अपर आयुक्त नगर निगम इंदौर

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