नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 44 हजार करोड़ से अधिक लागत वाले केन-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। सिंघार ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि 3400 करोड़ लागत से दौधन बांध का निर्माण कर रही एनसीसी लिमिटेड कंपनी ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए भाजपा को कमीशन के रूप में 60 करोड़ का चंदा दिया है। यही कंपनी भोपाल में भाजपा के दफ्तर का निर्माण कर रही है। सिंघार ने कहा कि फर्जी मुआवजा वितरण कर आदिवासियों की अनदेखी की जा रही है। खरिहानी गांव में मंजूर किए 11 करोड़ के मुआवजे में से 8 करोड़ रुपए उन लोगों को दे दिए गए, जो 1980-1990 के दशक में ही गांव छोड़ चुके थे। इस आदिवासी गांव में एक ऐसे मुस्लिम परिवार के खाते में भी मुआवजा राशि भेजी गई है, जो वहां कभी रहता ही नहीं था। आखिर आदिवासी गांव में मुस्लिम को मुआवजा कैसे दिया जा सकता है? सिंघार ने कहा कि घोस्ट हस्ताक्षर और फर्जी ग्राम सभा कर भूमि अधिग्रहण किया गया है। नियमों को ताक पर रखकर बिना बैठकों के ही कागजों पर ग्राम सभाएं दिखाई गईं। खरिहानी पंचायत में निर्वाचित सरपंच की जगह रतीराम मेहरबार नामक व्यक्ति के हस्ताक्षर मिले, जिन्होंने प्रस्ताव पारित होने के 6 महीने बाद पदभार ग्रहण किया था। सिंघार ने मुआवजा वितरण में गड़बड़ी के विरोध में कूपी गांव में आंदोलन करने वालों पर पुलिस द्वारा बर्बरता और अवैध वसूली के भी आरोप लगाए। सिंघार ने इनकी उच्चस्तरीय जांच और सोशल ऑडिट कराने की मांग उठाई है।
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