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नामांकन में गलत जानकारी देने पर जिला कोर्ट ने इंदौर के वार्ड 60 की कांग्रेस पार्षद सुनहरा अंसारी का निर्वाचन किया शून्य

नामांकन में गलत जानकारी देने पर जिला कोर्ट ने इंदौर के वार्ड 60 की कांग्रेस पार्षद सुनहरा अंसारी का निर्वाचन किया शून्य

जिला कोर्ट ने वार्ड 60 की कांग्रेस पार्षद सुनहरा अंसाफ अंसारी का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया है। कोर्ट ने सुनहरा के खिलाफ प्रस्तुत चुनाव याचिका को आं…और पढ़ें

Publish Date: Sat, 18 Jul 2026 12:05:56 PM (IST)Updated Date: Sat, 18 Jul 2026 12:05:56 PM (IST)

कोर्ट ने पार्षद अंसारी का निर्वाचन किया शून्य घोषित। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. जिला कोर्ट ने वार्ड 60 की कांग्रेस पार्षद सुनहरा अंसाफ अंसारी का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया है
  2. वर्ष 2022 में हुए नगर निगम चुनाव में सुनेहरा अंसाफ अंसारी ने लगभग पांच हजार मतों से जीत हासिल की थी
  3. उनके निर्वाचन को चुनौती देते हुए इफ्तेखार (मुन्ना) अंसारी ने जिला कोर्ट में चुनाव याचिका प्रस्तुत की थी

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। जिला कोर्ट ने वार्ड 60 की कांग्रेस पार्षद सुनहरा अंसाफ अंसारी का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया है। कोर्ट ने सुनहरा के खिलाफ प्रस्तुत चुनाव याचिका को आंशिक रूप से स्वीकारते हुए यह फैसला सुनाया है। हालांकि कोर्ट ने उनकी जगह किसी को फिलहाल पार्षद घोषित नहीं किया है।

वर्ष 2022 में हुए नगर निगम चुनाव में वार्ड 60 से सुनेहरा अंसाफ अंसारी ने लगभग पांच हजार मतों से जीत हासिल की थी। उनके निर्वाचन को चुनौती देते हुए इफ्तेखार (मुन्ना) अंसारी ने जिला कोर्ट में चुनाव याचिका प्रस्तुत की थी। इसमें आरोप लगाया था कि सुनहरा अंसारी ने नामांकन फार्म के साथ अपनी संपत्ति के संबंध में जो नो-ड्यूज प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया है वह गलत है। टैक्स की गणना भी कम की गई। यह आरोप भी लगाया था कि अंसारी ने भ्रामक प्रचार किया और मतदाताओं को भ्रमित किया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निगम अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए थे।

मौखिक निर्देश पर जारी किया था प्रमाण पत्र

निगम के अधिकारी महेंद्रसिंह राठौर ने अपने बयान में बताया था कि उन्हें नो-ड्यूज प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकृत पत्र जारी नहीं हुआ था। उन्होंने मौखिक निर्देश के आधार पर यह प्रमाण-पत्र जारी किया था। कोर्ट ने इस बयान के आधार पर नो-ड्यूज प्रमाण पत्र की वैधानिकता को संदिग्ध माना।

मामूली राशि जमा कर बनवाया था नो ड्यूज सर्टिफिकेट

103 पेज के फैसले में कोर्ट ने यह भी माना कि सुनहरा अंसारी के पति और उनकी संपत्तियों पर नगर निगम को टैक्स के रूप में बड़ी राशि वसूलना थी। यह राशि लंबे समय से बकाया थी। बावजूद इसके मामूली राशि जमा करवाकर नो-ड्यूज प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया था। आचार संहिता के उलंघन को देखते हुए कोर्ट ने सुनहरा अंसारी का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया।

फिलहाल कोई पार्षद नहीं रहेगा

याचिका में निकटतम प्रतिद्वंदी को निर्वाचित घोषित किए जाने की मांग की गई थी, लेकिन कोर्ट ने इससे इंकार कर दिया। कोर्ट ने इसके पीछे हाई कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला दिया है। कोर्ट ने फैसले में लिखा कि उपविजेता को विजेता घोषित होने के लिए इस बात के साक्ष्य देना होते हैं कि अगर विजेता चुनाव नहीं लड़ता तो दावेदार को निर्वाचित उम्मीदवार के पक्ष में डाले गए वैध मतों का बहुमत प्राप्त हो जाता, लेकिन इस मामले में ऐसा कोई साक्ष्य रिकार्ड पर नहीं है। सिर्फ अनुमान के आधार पर कोर्ट इस संबंध में आदेश नहीं दे सकती। कोर्ट ने सुनाहरा अंसारी की पार्षदी समाप्त करने के साथ ही यह आदेश भी दिया है कि वे वकील फीस के रूप में पांच हजार रुपये की राशि का भुगतान करें।

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