प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हुए करीब साढ़े तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन लाखों विद्यार्थियों तक अब भी पाठ्यपुस्तकें नहीं प…और पढ़ें
HighLights
- एमपी के सरकारी स्कूलों में सत्र शुरू होने के बाद भी किताबों का टोटा
- पहली से आठवीं कक्षा के 8.5 लाख बच्चों को नहीं मिली एक भी किताब
- राजधानी भोपाल वितरण में सबसे पीछे, ग्वालियर-इंदौर में भी बुरा हाल
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हुए करीब साढ़े तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन लाखों विद्यार्थियों तक अब भी पाठ्यपुस्तकें नहीं पहुंच सकी हैं। राज्य शिक्षा केंद्र की समीक्षा बैठक में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार पहली से आठवीं कक्षा तक के करीब 8.5 लाख विद्यार्थी ऐसे हैं, जिन्हें अब तक एक भी पाठ्यपुस्तक नहीं मिली।
वहीं 27 लाख से अधिक विद्यार्थियों को केवल कुछ विषयों की किताबें ही उपलब्ध हो सकी हैं। इससे बच्चों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है और शिक्षक भी बिना पाठ्यपुस्तकों के शिक्षण कार्य कराने को विवश हैं। निर्देशित किए गए हैं कि जिन जिलों में वितरण लंबित है, वहां जल्द से जल्द सभी विद्यार्थियों तक पाठ्यपुस्तकें पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि शैक्षणिक गतिविधियां बिना किसी बाधा के संचालित हो सकें।
निगम ने भेजीं 97% किताबें, पर विद्यालय स्तर पर लापरवाही
रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम ने पहली से आठवीं कक्षा तक की लगभग 97 प्रतिशत पाठ्यपुस्तकें जिलों को उपलब्ध करा दी हैं। इसके बावजूद विद्यालय स्तर पर वितरण में गंभीर लापरवाही सामने आई है। राज्य शिक्षा केंद्र ने सभी जिला परियोजना समन्वयकों को निर्देश दिए हैं कि वे वितरण की नियमित समीक्षा करें, सभी विद्यार्थियों तक सभी विषयों की पुस्तकें पहुंचाना सुनिश्चित करें और शिक्षा पोर्टल 3.0 पर इसकी जानकारी दर्ज करें।
15 अप्रैल तक पूरा होना था वितरण
स्कूल शिक्षा विभाग ने नए सत्र के साथ ही एक अप्रैल से पाठ्यपुस्तकों का वितरण शुरू कर दिया था। विभागीय योजना के अनुसार 15 अप्रैल तक सभी विद्यार्थियों को सभी विषयों की किताबें उपलब्ध करा दी जानी थीं। इसके बाद करीब डेढ़ महीने का ग्रीष्मकालीन अवकाश भी रहा और 16 जून से स्कूल दोबारा खुल गए। इसके बावजूद जुलाई के मध्य तक भी वितरण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। 15 जुलाई तक की समीक्षा रिपोर्ट में यह स्थिति सामने आई है।
भोपाल सबसे पीछे, बड़े शहरों की स्थिति भी चिंताजनक
पाठ्यपुस्तक वितरण में भोपाल जिला भी पीछे है। जिले में पहली से आठवीं तक 63,890 विद्यार्थियों का नामांकन है। इनमें केवल 26,854 विद्यार्थियों (42 प्रतिशत) को सभी किताबें मिली हैं। 16,345 विद्यार्थियों को कुछ विषयों की किताबें मिली हैं, जबकि 20,691 विद्यार्थियों (करीब 32 प्रतिशत) को अब तक एक भी पुस्तक नहीं मिली। इसी तरह ग्वालियर में 20,063, इंदौर में 19,456 और जबलपुर में 18,242 विद्यार्थी अभी भी पाठ्यपुस्तकों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
इन जिलों के विद्यार्थियों को नहीं मिली पाठ्यपुस्तकें
- शिवपुरी: 30,581
- खरगोन: 24,320
- छतरपुर: 23,937
- गुना: 23,909
- सागर: 23,909
- धार: 23,603
- झाबुआ: 23,688
- मंडला: 23,111
- मुरैना: 22,755
- बड़वानी: 21,345
सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी गई है और पाठ्यपुस्तकों का जल्द वितरण के निर्देश दिए गए हैं। – डॉ. अरुण सिंह, अपर संचालक, राज्य शिक्षा केंद्र
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