सिंधिया ने कहा कि, वो दिल्ली से मंत्री बनकर नहीं, बल्कि दतिया के परिवार के सदस्य के रूप में आए हैं। उन्होंने कहा कि, ‘आपके सुख के हर पल में भले हम मौजूद न रहे हों, लेकिन पिछले 300 साल में ऐसा कोई समय नहीं आया, जब संकट और विपदा में सिंधिया परिवार आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा न हुआ हो। उन्होंने अपने पुराने दौरों का उल्लेख करते हुए कहा कि, साल 1984 में उनके पिता ने उन्हें क्षेत्र का भ्रमण करने भेजा था। उस समय सड़कें नहीं थीं और लोग पगडंडियों से सफर करते थे, लेकिन आज दतिया में सड़क नेटवर्क में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि, उनके पिता ने ताज एक्सप्रेस का दतिया में ठहराव दिलाया था और अब दतिया में ताज तथा झेलम एक्सप्रेस दोनों का स्टॉपेज है।
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