अबूधाबी से इंदौर एयरपोर्ट पर पहुंची एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्ललाइट से सोने की तस्करी की जा रही थी। इंदौर सराफा बाजार का एक कारोबारी तस्करी सिंडिकेट क…और पढ़ें
HighLights
- अबूधाबी से इंदौर एयरपोर्ट पर पहुंची एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्ललाइट से सोने की तस्करी की जा रही थी
- इंदौर सराफा बाजार का एक कारोबारी तस्करी सिंडिकेट का मास्टरमाइंड निकला
- ज्वैलरी दुकान का पूर्व कर्मचारी कोरियर बनकर विदेश से सोने की खेप लाता था
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : अबूधाबी से इंदौर एयरपोर्ट पर पहुंची एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्ललाइट से सोने की तस्करी की जा रही थी। इंदौर सराफा बाजार का एक कारोबारी तस्करी सिंडिकेट का मास्टरमाइंड निकला। जबकि ज्वैलरी दुकान का पूर्व कर्मचारी कोरियर बनकर विदेश से सोने की खेप लाता था।
एयरपोर्ट पर तैनात ग्राउंड स्टाफ के साथ कस्टम विभाग का कर्मचारी भी तस्करी के नेटवर्क में शामिल थे। ये सोने को सुरक्षित एयरपोर्ट से बाहर निकलवाने में मदद करते थे। करीब 1.28 करोड़ रुपये के विदेशी सोने के साथ डायरेक्टोरेट आफ रेवन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआइ) की जोनल यूनिट ने पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है।
तस्करी के इस मामले का पहला सुराग सोमवार तड़के लगा। भौर होने के पहले इंदौर एयरपोर्ट पर उतरी अबूधाबी से आई फ्लाइट (आइएक्स-248) में एक यात्री गोविंद पोरवाल को डीआरआई के अधिकारियों ने पूछताछ के लिए रोक लिया। उसी दौरान डीआरआई की एक टीम ने एयरपोर्ट के बाहर से 1 किलो 20 ग्राम सोने के साथ सराफा के व्यापारी संजय मुंजे और एयर इंडिया के ग्राउंड स्टाफ वासुदेव बरनाले व हेंडलिंग एजेंसी के पूर्व कर्मचारी अमल गेहलोत को हिरासत में लिया।
सप्ताह में चार दिन आने वाली इस उड़ान के यात्रियों की प्रोफाइलिंग शुरू की गई
डीआरआई ने तस्करी के सोने के साथ पकड़े गए चारों आरोपितों से पूछताछ शुरू की। 24 घंटे तक चली पूछताछ के बाद डीआरआई ने सीमा शुल्क (कस्टम) के एक कर्मचारी अजय कुमार सेन को भी हिरासत में ले लिया। डीआरआइ के अधिकारियों को गोपनीय सूचना मिली थी कि अबूधाबी के लिए जुलाई में शुरू हुई फ्लाइट से सोने की तस्करी की जा रही है। सप्ताह में चार दिन आने वाली इस उड़ान के यात्रियों की प्रोफाइलिंग शुरू की गई। बीते दिनों से लगातार निगरानी के बाद सोमवार-मंगलवार को पूरे आपरेशन को अंजाम दिया गया।
एयरपोर्ट पर तैनात कर्मचारी ही देता था सूचना
एयरपोर्ट पर विदेश से आने वाले यात्रियों की जांच का जिम्मा कस्टम विभाग के अधिकारियों के पास होता है। हालांकि सोना तस्करी के इस मामले में कस्टम विभाग की ओर से एयरपोर्ट पर तैनात अधिकारी ही गोपनीय सूचनाएं तस्कर को दे रहा था।
सोना तस्करी करने वाला संजय मुंजे ने विदेश से फ्लाइट के द्वारा सोना लाने का जिम्मा गोविंद पोरवाल को सौंपा था। पोरवाल पहले सराफा बाजार में एक ज्वैलरी की दुकान पर ही कर्मचारी था। पोरवाल तय योजना के अनुसार सोने को हाथ के कड़े की शक्ल में ढलवाकर लाया।
जांच एजेंसियों की नजर से बचाने के लिए सोने के कड़े के ऊपर चांदी का रंग चढ़ा दिया गया। एयरपोर्ट पर पहुुंचने के बाद कस्टम की जांच से पहले एयरोब्रिज पर ही पोरवाल वासुदेव बरनाले को सोना सौंप देता था। क्योंकि वासुदेव एयर इंडिया का ग्राउंड स्टाफ था इसलिए उसकी जांच नहीं होती।
वह सोने को एयरपोर्ट से बाहर जाकर अमन गेहलोत के जरिए संजय मुंजे तक भेजता था। इस सबके बीच कस्टम विभाग का टैक्स असिस्टेंट अजय कुमार सेन जो कि एयरपोर्ट पर तैनात रहता था वह तस्कर संजय व अन्य को सूचना देता था कि डीआरआई व कस्टम की जांच के लिए अधिकारी कहां तैनात है और कैसे एयरपोर्ट से बाहर निकला जा सकता है। संजय मुंजे प्रति खेप के कस्टम अधिकारी और ग्राउंड स्टाफ के मददगार को 10 हजार रुपये देता था।
सराफा में बिक रहा था
पूछताछ और बयान दर्ज करने के बाद डीआरआई ने पांचों आरोपितों को कोर्ट में पेश किया। वहां से इन्हें 18 अगस्त तक की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पता चला है कि तस्करी से लाया गया सोना सराफा बाजार में ही खपाया जाता था। मुंजे की छोटा सराफा में दुकान हैं। वह सराफा बाजार में काम कर रहे कुछ दलालों से जुड़ा था। जिनके जरिए सोने को ज्वैलर्स को खपाया जाता था। तस्करी के इस सोने पर प्रति दस ग्राम 5 से 10 हजार रुपये का मुनाफा कमाया जाता था।
इंदौर एयरपोर्ट पर आबूधाबी से आई फ्लाइट के यात्री के पास मिला 2 करोड़ का सोना, तस्करी की आशंका
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